Ganesh Chaturthi 2022: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी महासिद्धि विनायक कहलाती है और इसी दिन से गणपति उत्सव की शुरुआत होती है। गणपति की उपासना का महापर्व गणेश चतुर्थी इस बार 31 अगस्त,बुधवार को मनाया जाएगा और इसी दिन से गणेश उत्सव की शुरुआत हो जाती है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विद्या-बुद्धि के प्रदाता,विघ्न-विनाशक,मंगलकारी,सिद्धिदायक , सुख-समृद्धि और यश-कीर्ति देने वाले देवता माना गया है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार ‘ॐ’और स्वास्तिक को भी साक्षात गणेश जी का स्वरूप माना गया है। तभी तो कोई भी शुभ कार्य की शुरुआत इनसे ही होती है। गणपति की साधना में उनकी विभिन्न प्रकार की प्रतिमाओं का अपना अलग ही महत्व है इनमें से श्वेतार्क गणेशजी की प्रतिमा अत्यंत ही शुभ फल प्रदान करने वाली होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्वेतार्क की जड़ में गणेश जी का वास होता है और यदि इस जड़ को अपने घर या दुकान में विधि-विधान से स्थापित किया जाये तो घर में सुख-समृद्धि का वास हमेशा बना रहता है।
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Ganesh Chaturthi 2022: श्वेतार्क गणेशजी की पूजा करने के मिलते हैं जबरदस्त फायदे,जानिए महत्व और पूजाविधि
Mon, 29 Aug 2022 11:31 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 29 Aug 2022 11:31 AM IST
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Ganesh Chaturthi 2022: भाद्रपद चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का जन्मोत्सव बड़े ही उत्साह और धूम-धाम के साथ मनाया
- फोटो : अमर उजाला
गणेश जी
- फोटो : amar ujala
क्या है श्वेतार्क गणपति
शास्त्रों के अनुसार श्वेतार्क गणेशजी आंकड़े के पौधे की जड़ में प्रकट होते हैं। आंकड़े को आक का पौधा भी कहा जाता है। इस पौधे के फूलों को शिवलिंग पर भी अर्पित किया जाता है। आंकडे के पौधे की एक दुर्लभ प्रजाति है सफेद आंकड़ा। इसी सफेद आंकड़े की जड़ में श्वेतार्क गणपति की प्रतिकृति निर्मित होती है। किसी भी पौधे की जड़ में गणपति की प्रतिकृति बनने में कई वर्षों का समय लगता है।
शास्त्रों के अनुसार श्वेतार्क गणेशजी आंकड़े के पौधे की जड़ में प्रकट होते हैं। आंकड़े को आक का पौधा भी कहा जाता है। इस पौधे के फूलों को शिवलिंग पर भी अर्पित किया जाता है। आंकडे के पौधे की एक दुर्लभ प्रजाति है सफेद आंकड़ा। इसी सफेद आंकड़े की जड़ में श्वेतार्क गणपति की प्रतिकृति निर्मित होती है। किसी भी पौधे की जड़ में गणपति की प्रतिकृति बनने में कई वर्षों का समय लगता है।
गणपति मंदिर
- फोटो : Pixabay
श्वेतार्क गणपति की पूजा महत्व
यह गणेशजी का प्राकृतिक और चमत्कारी स्वरूप है। मान्यता है कि यदि इस जड़ को यानी श्वेतार्क गणपति को अपने घर में स्थापित करके यदि प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जाए तो यह प्रतिमा सिद्ध हो जाती है और इसमें गणपति का वास हो जाता है। जिस परिवार में आंकड़े के गणेश की रोज पूजा होती है,वहां दरिद्रता,रोग व परेशानियां का वास नहीं करती हैं। इस तरह की गणेश प्रतिमा की पूजा करने से सुख व सफलता के साथ ही भरपूर धन व वैभव प्राप्त होता है। श्वेतार्क गणपति की पूजा करने पर सभी प्रकार की दैविक बाधाओं से रक्षा होती है एवं गणपति की इस मूर्ति की पूजा से भूत,प्रेत,नजर दोष,जादू-टोना और तंत्र-मंत्र आदि का भय नहीं रहता है।
यह गणेशजी का प्राकृतिक और चमत्कारी स्वरूप है। मान्यता है कि यदि इस जड़ को यानी श्वेतार्क गणपति को अपने घर में स्थापित करके यदि प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जाए तो यह प्रतिमा सिद्ध हो जाती है और इसमें गणपति का वास हो जाता है। जिस परिवार में आंकड़े के गणेश की रोज पूजा होती है,वहां दरिद्रता,रोग व परेशानियां का वास नहीं करती हैं। इस तरह की गणेश प्रतिमा की पूजा करने से सुख व सफलता के साथ ही भरपूर धन व वैभव प्राप्त होता है। श्वेतार्क गणपति की पूजा करने पर सभी प्रकार की दैविक बाधाओं से रक्षा होती है एवं गणपति की इस मूर्ति की पूजा से भूत,प्रेत,नजर दोष,जादू-टोना और तंत्र-मंत्र आदि का भय नहीं रहता है।
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दिल्ली का सिद्धि विनायक मंदिर
- फोटो : ANI
पूजा विधि
श्वेतार्क की जड़ लेकर उसे साफ करके शुद्ध जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कराएं और फिर लाल कपड़े पर स्थापित करके उसकी प्रतिदिन पूजा करें। गणपति की पूजा में लाल चन्दन, अक्षत,पुष्प,सिंदूर,दूर्वा,सुपारी,जनेऊ का प्रयोग विशेष रूप से करें। इसके बाद धूप-दीप से गणेशजी की आरती करें। इसके बाद गणपति के मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का एक माला जप अवश्य करें। मंत्र जाप के लिए स्फटिक या फिर रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।
श्वेतार्क की जड़ लेकर उसे साफ करके शुद्ध जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कराएं और फिर लाल कपड़े पर स्थापित करके उसकी प्रतिदिन पूजा करें। गणपति की पूजा में लाल चन्दन, अक्षत,पुष्प,सिंदूर,दूर्वा,सुपारी,जनेऊ का प्रयोग विशेष रूप से करें। इसके बाद धूप-दीप से गणेशजी की आरती करें। इसके बाद गणपति के मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का एक माला जप अवश्य करें। मंत्र जाप के लिए स्फटिक या फिर रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।