कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। यह तिथि सर्वार्थसिद्धि देने वाली मानी गई है। इस वर्ष दिवाली का त्योहार 14 नवंबर को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। दिवाली पर धन की देवी मां लक्ष्मी का पूजन होता है। माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी स्वयं पधारती हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ पूजन करने पर सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसलिए दिवाली के बहुत दिन पहले से ही मां के स्वागत की तैयारियां हर घर में होने लगते हैं। लोग अपने घर की साफ-सफाई के साथ रंगाई करते हैं घरों को दुल्हन की तरह सजा दिया जाता है लेकिन क्या आपको पता है कि वास्तु के अनुसार मां लक्ष्मी के स्वागत में घर को सजाने से आपको धन की देवी की कृपा दृष्टि प्राप्त हो सकती है। जानते हैं वास्तु के वे उपाय जिनको करने से पा सकते हैं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद....
किसी के भी स्वागत में सबसे पहले घर का मुख्य द्वार सजाया जाता है। मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए आप भी अपने घर को मुख्य द्वार को अच्छे से सजाएं। आम के पत्तो को बहुत शुभ माना जाता है। हर पूजा-पाठ के कार्यों में आम के पत्तो का उपयोग करते हैं। इसलिए दिवाली पर आम के पत्तों और गेंदे के फूलों की तोरण से मुख्य द्वार को सजाएं। पूजा घर को सजाने में भी गेंदे के फूल और आम के पत्तों का प्रयोग अवश्य करें। वास्तु की दृष्टिसे भी आम के पत्ते शुभ माने जाते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
वास्तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर किसी प्रकार की बाधा शुभ नहीं मानी जाती है। जिन लोगों के द्वार पर कोई रुकावट होती है वहां पर धन और समृद्धि के आगमन में भी रुकावट आती है। दिवाली पर मां लक्ष्मी का हमारे घर में आगमन होता है इसलिए मुख्य द्वार पर अगर कोई भी ईंट पत्थर या अन्य कोई भारी सामान या रुकावट हो तो उसे तुरंत हटा दें। घर की देहली की किनारी आदि अगर टूटी हुई है तो उसे सही करवा लें।
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दिवाली 202 सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हमारे धर्म और वास्तु दोनों में ही स्वास्तिक के चिह्म को बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक या कोई भी शुभ और नया कार्य आरंभ करने से पहले स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाते हैं। दिवाली पर अपने दरवाजे और दीवारों पर स्वास्तिक का चिह्न सिंदूर से बनाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा तो आती ही है साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।
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दिवाली 2020 मां लक्ष्मी, गणपति देव और कुबेर जी की प्रतिमा किस दिशा में रखें (प्रतीकात्मक तस्वीर)
किस दिशा में रखे भगवान की प्रतिमाएं
वास्तु में दिशाओं का बहुत महत्व बताया गया है। वास्तु के अनुसार पूजा करते समय साधक का मुख और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं सही दिशा में रखना बहुत आवश्यक होता है। दिवाली पर मां लक्ष्मी और धन के देवता माने जाने वाले कुबेर जी की मूर्ति को उत्तर दिशा की ओर रखें, जिससे पूजा करते समय आपका मुख उत्तर दिशा की ओर रहे। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और पद चिह्न लगाएं।