दिवाली का त्योहार धनतेरस के दिन से ही आरंभ हो जाता है। धनतेरस से ही पूजा-पाठ और दीप जलाने की परंपरा शुरु हो जाती है। दिवाली शुभता और सुख-समृद्धि का त्योहार है। हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष दिवाली का पर्व 14 नवंबर को मनाया जाएगा। दिवाली पर मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इससे पूरे वर्ष घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है। दिवाली पर कुछ मंगल कार्य अवश्य करने चाहिए। इन कार्यों को करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। तो चलिए जानते हैं कौन से हैं वे शुभ कार्य...
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diwali 2020
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दिवाली पर मां लक्ष्मी आपके घर पधारती हैं, इसलिए घर के द्वार पर आम या पीपल के नए कोमल पत्तों और गेंदे के फूल की माला बनाकर सजाना चाहिए। इसे वंदनवार या तोरण कहा जाता है। दिवाली पर आम के पत्तों की तोरण लगाना बहुत ही शुभ रहता है। आम के पत्तों का प्रयोग देव पूजा करने के लिए भी किया जाता है। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
दिवाली पर दरवाजें या फिर आंगन के बीचों-बीच फूलो और रंगों से रंगोली बनाने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है। रंगोली या मांडना का 'चौंसठ कलाओं' में स्थान माना जाता है। इसलिए हर उत्सव एवं मांगलिक अवसरों घर-आंगन को रंगोली से सजाया जाता है। मां लक्ष्मी के स्वागत में आप भी अपने घर पर रंगोली जरुर बनाएं।
आज के समय में मिट्टी के दियों की जगह बाजार की लाइटों और मोमबत्तियों ने ले ली है। लेकिन दिवाली पर मिट्टी के बने हुए पारंपारिक दीपक ही जलाना शुभ रहता है। क्योंकि इसमें मिट्टी, आकाश, जल, अग्नि और वायु सभी का मिश्रण होता है। इसलिए अनुष्ठान में मिट्टी के दीपक जलाने बहुत अच्छा रहता है। मिट्टी के दीपक में तेल डालकर जलाने का महत्व वैज्ञानिक तौर पर भी माना जाता है।
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हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य में मंगल कलश रखने की परंपरा है। इसलिए दिवाली पर भी एक कलश में जल भरकर उसमें कुछ आम के पत्ते लगाकर रखना चाहिए। नारियल के मुख पर नारियल भी लगाना चाहिए। कलश पर रोली से स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं और कलश की मुख पर मौली बांधनी चाहिए।