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चाणक्य नीति: इन चार चीजों में कभी भी नहीं करनी चाहिए शर्म, जीवन में हमेशा रहेगी संतुष्टि और खुशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Tue, 06 Apr 2021 09:20 PM IST
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आचार्य चाणक्य
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आचार्य चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान और योग्य शिक्षक थे। चाणक्य को कई विषयों की गहरी समझ थी। उन्होंने समाजशास्त्र,राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र और नीतिशास्त्र की रचना की। आचार्य चाणक्य चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे परंतु फिर भी वे एक साधारण जीवन व्यतीत करते थे। वे महलों के राजसी ठाट-वाट से दूर साधारण घर में रहते थे, क्योंकि वे भले ही जीवन की आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए धन को महत्वपूर्ण मानते थे लेकिन आत्म संतुष्टि को ज्यादा महत्व देते थे। नीतिशास्त्र में चार ऐसे कार्यों के बारे में जिक्र किया गया है, जिन्हें करते समय कोई संकोच नहीं करना चाहिए। तभी व्यक्ति जीवन में मान-सम्मान और सच्चे सुख का अनुभव कर सकता है।
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आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को कभी भी सादा जीवन व्यतीत करने में संकोच नहीं करना चाहिए। कहने का तात्पर्य ये है कि जैसी परिस्थिति हो व्यक्ति को वैसा ही रहना चाहिए कभी भी दिखावे के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। यदि आप जैसे हैं वैसे ही दूसरों के सामने रहेंगे तो सही मायने में सच्चा सुख और सम्मान प्राप्त होता है। दिखावा करने वाला व्यक्ति सही मायने में सुखी नहीं रह पाता है।
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पुराने और सादे कपड़े पहनने में नहीं करना चाहिए शर्म
कई बार हम दूसरों को देखकर सादे कपड़े पहनने में शर्म महसूस करते हैं कि कोई क्या कहेगा, लेकिन कभी भी पुराने या सादे कपड़े पहनने में शर्म नहीं करनी चाहिए। आपने पुराने कपड़े पहने हैं या फिर महंगे इस बात से फर्क नहीं पड़ता है लेकिन आपने कपड़े किस तरह से पहने हैं इस बात को ध्यान में रखना चाहिए। कपड़े चाहे जैसे भी हो उन्हें सलीके से पहनना चाहिए।
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गरीब साथियों के साथ न करें शर्म
आचार्य चाणक्य के अनुसार कभी भी मनुष्य को निर्धन मित्र के साथ रहने से कभी भी शर्म नहीं करनी चाहिए, क्योंकि मित्रता की तुलना कभी भी धन से नहीं की जाती है। सच्चा मित्र धनवान नहीं बल्कि समय पर साथ देने वाला होता है।
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वृद्ध माता पिता के साथ न करें शर्म
मनुष्य के जीवन में सबसे पहले उसके माता-पिता का स्थान होना चाहिए। मनुष्य को कभी भी अपने वृद्ध माता पिता के साथ कहीं जाने या उनके साथ रहने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को हमेशा अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए।
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