श्रीरामरक्षास्तोत्रम् या श्री राम रक्षा स्तोत्र बुध कौशिक ऋषि द्वारा रचित है, इसमें उन्होंने श्रीराम का स्तुति गान किया है। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखा गया है, इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन भगवान शिव ऋषि बुध कौशिक के स्वपन में आए श्रीरामरक्षास्तोत्रम् सुनाया, कौशिक ऋषि नें प्रातः उठकर इसकी रचना कर दी। यह पाठ बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। इसका पाठ करने से राम जी के साथ शिव जी की कृपा भी प्राप्त होती है।
श्रीरामरक्षास्तोत्रम् का पाठ करने से प्रभु श्री राम करते हैं हर संकट को दूर
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श्रीरामरक्षास्तोत्रम् का पाठ करने से प्रभु श्रीराम हर विपत्ति से अपने भक्त की रक्षा करते हैं। प्रभु श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, वे अपनी शरण में आने वाले की हर प्रकार से रक्षा करते हैं। जो व्यक्ति नियमित रुप से इस स्त्रोत का पाठ करता है। उसे किसी बात का भय नहीं रहता है। वह निर्भीक हो जाता है।
हनुमान जी श्री राम के भक्त हैं इस स्तोत्र का पाठ करने से राम जी के साथ बजरंगबली की कृपा भी मिलती है और वे हर संकट से आपकी रक्षा करते हैं। श्री रामरक्षा स्त्रोत का नियमित सच्चे मन से पाठ करने से साधक के चारों ओर एक सुरक्षा का घेरा बन जाता है। व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मान्यता है कि अगर आप राम रक्षा स्त्रोत का पाठ पूरे विधि-विधान से 11 बार करते हैं और इस समय किसी पात्र में सरसों के कुछ दानें लेकर उन दानों में पाठ करते समय अपनी अंगुलियों को घुमाते रहते हैं तो वह सिद्ध हो जाते हैं। इस तरह से सिद्ध किए गए सरसों के दानों को घर में किसी पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए।
अगर आप यात्रा पर जाते हैं या किसी कानूनी मामले के काम से कहीं जाते हैं तो यह दाने आपकी रक्षा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यदि आपको सोते समय भय लगता है तो यह दाने आपको हर तरह के भय से मुक्ति दिलाते हैं।
जिस तरह से रामरक्षास्तोत्रम् के पाठ से सरसों को सिद्ध किया जाता है, उसी तरह से पानी को भी सिद्ध किया जा सकता है। कहते हैं कि अगर इस पानी को किसी रोगी को पिलाया जाए या इस पानी से रोगी को औषधि दी जाए तो वह बहुत प्रभावशाली होती है। रोगी जल्द स्वस्थ होने लगता है। पानी को सिद्ध करने के लिए एक तांबे के पात्र में पानी भर लें। रामरक्षास्तोत्रम् का पाठ करते समय इस पात्र को अपने हाथ में रखें और अपनी दृष्टि को पानी में रखना चाहिए। ये उपाय लोगों की मान्यता परा आधारित है।