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इन 7 कारणों से नवरात्र के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा करें

Wed, 14 Oct 2015 11:56 AM IST
Updated Wed, 14 Oct 2015 11:56 AM IST
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इन 7 कारणों से नवरात्र के दूसरे द‌िन ब्रह्मचार‌िणी देवी की पूजा करें

brahmcharini devi puja navratra

नवरात्र के दूसरे द‌िन देवी के ब्रह्मचार‌िणी रूप की पूजा होगी। इस देवी का स्‍थान नवदुर्गा के नौ रूपों में दूसरा है। जीवन में कामयाबी पाने के ल‌िए संयम, सदाचार, तप, वैराग और त्याग की जरुरत होती है। इस देवी की पूजा से मनुष्य में इन गुणों का व‌िकास होता ज‌िसे वह र‌िद्ध‌ि स‌िद्ध‌ि प्राप्त करने में कामयाब होता है।

इन 7 कारणों से नवरात्र के दूसरे द‌िन ब्रह्मचार‌िणी देवी की पूजा करें

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देवी भागवत् में उल्लेख आया है क‌ि माता नारद मुन‌ि के कहने पर भगवान श‌िव को पत‌ि रूप में पाने के ल‌िए तपस्या करने वन में चली जाती हैं। तपस्या में लीन रहने के कारण माता ब्रह्मचार‌िणी कहलाती हैं।

इन 7 कारणों से नवरात्र के दूसरे द‌िन ब्रह्मचार‌िणी देवी की पूजा करें

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हजारों वर्ष तक तपस्या करते हुए माता ने पत्तों का सेवन भी बंद कर द‌िया और केवल वायु पीकर रहने लगी इसल‌िए देवी का अन्य नाम अर्पणा भी है।

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देवी पार्वती को तपस्या में लीन देखकर घबरायी हुई इनकी माता मैना ने उमा कहकर देवी को पुकारा। इसल‌िए उमा, अर्पणा और ब्रह्मचार‌िणी नाम से यही देवी जानी जाती हैं। इनकी साधना पूजा से आत्मव‌िश्वास और कार्य में सफलता म‌िलती है।

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मां ब्रह्मचार‌िणी देवी की पहचान है दाएं हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडलु। जपमाला तपस्या का प्रतीक है और कमंडलु स‌िद्ध‌ि प्राप्त‌ि का सूचक। माता का यह स्वरूप बताता है क‌ि जो तपस्या करते हैं उन्हें सफलता न‌िश्च‌ित म‌िलती है।

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