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Amalaki Ekadashi 2021: आमलकी एकादशी पर जरूर सुनें यह कथा, तभी मिलेगा व्रत का पूर्ण लाभ, जानें व्रत विधि और महत्व

Thu, 18 Mar 2021 07:45 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 18 Mar 2021 07:45 AM IST
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Amalaki Ekadashi 2021 vrat kath of Amalaki Ekadashi in Hindi
आमलकी एकादशी 2021: व्रत कथा - फोटो : अमर उजाला।

आमलकी एकादशी व्रत 25 मार्च को रखा जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर साल फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रखा जाता है। होली से कुछ दिन पहले पड़ने के कारण इसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति आमलकी एकादशी व्रत को विधि-विधान से रखता है उसे भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन व्रत का लाभ व्रती को तभी मिलता है जब वह आमलकी एकादशी की व्रत कथा को सुनता या पढ़ता है। आइए जानते हैं आमलकी एकादशी व्रत का मुहूर्त, व्रत विधि और कथा।

Amalaki Ekadashi 2021 vrat kath of Amalaki Ekadashi in Hindi
आमलकी एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।

आमलकी एकादशी व्रत मुहूर्त

एकादशी तिथि का प्रारंभ - 24 मार्च को सुबह 10 बजकर 23 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त - 25 मार्च को 09 सुबह 47 मिनट तक
एकादशी व्रत पारण का समय - 26 मार्च को सुबह 06:18 बजे से 08:21 बजे तक
Amalaki Ekadashi 2021 vrat kath of Amalaki Ekadashi in Hindi
आमलकी एकादशी व्रत विधि  - फोटो : सोशल मीडिया
आमलकी एकादशी व्रत विधि 
  • प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें। 
  • व्रत का संकल्प लें और फिर विष्णु जी की आराधना करें।
  • भगवान विष्ण़ु को पीले फूल अर्पित करें। 
  • घी में हल्दी मिलाकर भगवान विष्ण़ु का दीपक करें। 
  • पीपल के पत्ते पर दूध और केसर से बनी मिठाई रखकर भगवान को चढ़ाएं। 
  • एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं।
  • भगवान विष्णु को केले चढ़ाएं और गरीबों को भी केले बांट दें। 
  • भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी का पूजन करें और गोमती चक्र और पीली कौड़ी भी पूजा में रखें।
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Amalaki Ekadashi 2021 vrat kath of Amalaki Ekadashi in Hindi
आमलकी एकादशी व्रत का महत्व - फोटो : सोशल मीडिया

आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। मान्यता है कि सृष्टि की रचना के समय भगवान विष्णु ने आंवले को पेड़ के रूप में प्रतिष्ठित किया था। इसलिए आंवले के पेड़ में ईश्वर का स्थान माना गया है। आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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Amalaki Ekadashi 2021 vrat kath of Amalaki Ekadashi in Hindi
आमलकी एकादशी व्रत कथा - फोटो : सोशल मीडिया

आमलकी एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में चित्रसेन नामक राजा था। उसके राज्य में एकादशी व्रत का बहुत महत्व था। राजा समेत सभी प्रजाजन एकादशी का व्रत श्रद्धा भाव के साथ किया करते थे। राजा की आमलकी एकादशी के प्रति बहुत गहरी आस्था थी। एक बार राजा शिकार करते हुए जंगल में बहुत दूर निकल गये। उसी समय कुछ जंगली और पहाड़ी डाकुओं ने राजा को घेर लिया और डाकू शस्त्रों से राजा पर प्रहार करने लगे, परंतु जब भी डाकू राजा पर प्रहार करते वह शस्त्र ईश्वर की कृपा से पुष्प में परिवर्तित हो जाते। डाकुओं की संख्या अधिक होने के कारण राजा संज्ञाहीन होकर भूमि पर गिर गए। तभी राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई और उस दिव्य शक्ति ने समस्त दुष्टों को मार दिया, जिसके बाद वह अदृश्य हो गई। 

जब राजा की चेतना लौटी तो उसने सभी डाकुओं को मरा हुआ पाया। यह दृश्य देखकर राजा को आश्चर्य हुआ। राजा के मन में प्रश्न उठा कि इन डाकुओं को किसने मारा। तभी आकाशवाणी हुई कि हे राजन! यह सब दुष्ट तुम्हारे आमलकी एकादशी का व्रत करने के प्रभाव से मारे गए हैं। तुम्हारी देह से उत्पन्न आमलकी एकादशी की वैष्णवी शक्ति ने इनका संहार किया है। इन्हें मारकर वह पुन: तुम्हारे शरीर में प्रवेश कर गई। यह सारी बातें सुनकर राजा को अत्यंत प्रसन्नता हुई, एकादशी के व्रत के प्रति राजा की श्रद्धा और भी बढ़ गई। तब राजा ने वापस लौटकर राज्य में सबको एकादशी का महत्व बतलाया।

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