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अक्षय तृतीया के दिन ही क्यों होते हैं बांके बिहारी जी के चरण दर्शन? जानें इसका अद्भुत रहस्य

Sun, 20 Apr 2025 05:55 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 20 Apr 2025 05:55 AM IST
सार

Akha Teej: अक्षय तृतीया हिन्दू धर्म में एक अत्यंत शुभ और पुण्यकारी तिथि मानी जाती है, जो हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल तृतीया को पड़ती है। इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि यह तिथि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत उत्तम मानी जाती है

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Akshaya Tritiya Why Banke Bihari Charan Revealed Only On Akshaya Tritiya Know Myth History in Hindi
banke bihari - फोटो : adobe stock

Banke Bihari Charan Darshan: अक्षय तृतीया हिन्दू धर्म में एक अत्यंत शुभ और पुण्यकारी तिथि मानी जाती है, जो हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल तृतीया को पड़ती है। इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि यह तिथि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत उत्तम मानी जाती है। स्वर्ण खरीदारी, गृह प्रवेश, विवाह, और धार्मिक अनुष्ठान इस दिन बिना मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं, क्योंकि यह तिथि कभी न समाप्त होने वाला पुण्य फल देती है।

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लेकिन इस दिन का महत्व सिर्फ इसके धार्मिक पहलू तक सीमित नहीं है। वृंदावन स्थित बांके बिहारी जी के मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन एक अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी दृश्य देखने को मिलता है। इस दिन, भक्तों को केवल एक बार भगवान के चरणों के दर्शन होते हैं। बाकी दिनों में ठाकुर जी के चरण वस्त्रों से ढके रहते हैं। यह परंपरा स्वामी हरिदास जी की भक्ति से जुड़ी है, जिन्होंने भगवान के चरणों से धन प्राप्त किया था। इस दिन के दर्शन से भक्तों को न केवल दिव्यता का आभास होता है, बल्कि उनकी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।

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बांके बिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

स्वामी हरिदास जी की भक्ति से जुड़ी परंपरा
वृंदावन स्थित बांके बिहारी जी के मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन चरण दर्शन की परंपरा एक बहुत ही पुरानी और भावनात्मक कथा से जुड़ी हुई है। यह परंपरा स्वामी हरिदास जी की भक्ति से उत्पन्न हुई, जो भगवान श्री कृष्ण के परम भक्त थे। स्वामी हरिदास जी का जीवन पूरी तरह से भगवान की सेवा, भक्ति और प्रेम से ओत-प्रोत था। उनके भजन और संगीत ने न केवल वृंदावन बल्कि सम्पूर्ण भारत में कृष्ण भक्ति की गहरी धारा बहाई।

एक बार स्वामी जी को भगवान से सेवा के लिए कुछ धन की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने प्रभु से विनम्रता से प्रार्थना की और उसी रात उनके ध्यान में भगवान के चरणों के पास एक स्वर्ण मुद्रा प्रकट हुई। यह देख स्वामी जी ने भगवान के चरणों में संपूर्ण श्रद्धा और समर्पण का अनुभव किया। यही अनुभव उनके जीवन का एक निर्णायक मोड़ बना, और तभी से उन्होंने यह मान लिया कि भगवान के चरणों में न केवल दिव्यता है, बल्कि वहां से सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुख प्राप्त होते हैं।

स्वामी हरिदास जी की भक्ति के बाद, यह मान्यता फैल गई कि जब भी भक्तों को सेवा या भोग के लिए धन की आवश्यकता होती है, तो उन्हें भगवान के चरणों से स्वर्ण मुद्रा प्राप्त होती थी। इस घटनाक्रम ने भगवान के चरणों को एक विशेष महत्व दे दिया और साथ ही यह परंपरा भी जन्मी कि भगवान के चरण केवल अक्षय तृतीया के दिन ही प्रकट होंगे, ताकि भक्तों के जीवन में अमूल्य आशीर्वाद और पुण्य का वास हो सके।
 

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बांके बिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

अक्षय तृतीया के दिन चरण दर्शन
हर साल अक्षय तृतीया के दिन वृंदावन में लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं, इस उम्मीद में कि उन्हें भगवान के चरणों के दर्शन होंगे। इस दिन ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के चरणों का पर्दा हटाया जाता है और श्रद्धालु केवल कुछ क्षणों के लिए उनके दिव्य चरणों का दर्शन करते हैं। यह दर्शन भक्तों के लिए किसी दिव्य अनुकंपा से कम नहीं होते क्योंकि उन्हें विश्वास होता है कि इस दिन के दर्शन से उनके जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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बांके बिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

अक्षय तृतीया का आध्यात्मिक महत्व
अक्षय तृतीया का आध्यात्मिक महत्व भी बहुत गहरा है। इसे त्रेता युग की शुरुआत, परशुराम जयंती, गंगा अवतरण और अन्नदान जैसे पुण्य कार्यों से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि इस दिन को दान और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है। जो भी इस दिन सच्चे मन से भगवान के चरणों की पूजा करता है, उसे अक्षय फल प्राप्त होता है, जो कभी समाप्त नहीं होता।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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