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B'day Special: मठ की महत्ता देखिए, जहां से योगी पहले बने महंत अब मुख्यमंत्री

Mon, 05 Jun 2017 11:31 AM IST
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह Updated Mon, 05 Jun 2017 11:31 AM IST
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akhand jyoti in gorakhnath temple

उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस मठ से जुड़े हैं। वहीं से वे महंत बने और अब मुख्यमंत्री। मठ कई मायनों में अपना अलग महत्व रखता है। उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मठ के महंत हैं। क्या आप जानते है कि इसी मठ के कारण उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर का नाम पड़ा। मकर संक्रांति के मौके पर यहां पर खिचड़ी मेला नाम से विशाल मेला भी लगता हैं।  योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन पर जानें इस मठ की कुछ खास बातें—

akhand jyoti in gorakhnath temple

-गोरखनाथ मंदिर गुरु गोरक्षनाथ की तप स्थली है। वे कांगड़ा स्थित ज्वाला देवी के दरबार से भ्रमण करते यहां आए। यहां पर धूनी रमाई तो यही के हो कर रह गए। 52 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ यह गोरक्ष पीठ धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में समय-समय पर अहम योगदान देता रहा है। नाथ पंथ की योग परंपरा के कारण यह पीठ पूरी दुनिया में जाना जाता है। 

akhand jyoti in gorakhnath temple

मंदिर से प्रकाशित धार्मिक पुस्तकों में दर्ज उल्लेखों के अनुसार हिमालय के अनेक तीर्थों का भ्रमण करते हुए गुरु गोरखनाथ ज्वाला देवी के स्थान पर पहुंचे। ज्वाला देवी ने उनसे अपने स्थान पर आतिथ्य ग्रहण करने की इच्छा प्रकट की। उन्हें भोजन समर्पित करना चाहा। तब गोरखनाथ ने देवी से खिचड़ी ग्रहण करने की इच्छा जताई।  लेकिन जब बात खिचड़ी बनाने की आई तो उन्होंने कहा कि बलि समर्पित वाली जगर पर आहार ग्रहण करने में समर्थता जताई और देवी को पानी गर्म करने का कहकर चावल लेने गोखरपुर पहुंच गए। यही पर खप्पर रख कर साधना करने लगे और यहीं रह गए। 

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akhand jyoti in gorakhnath temple

-मध्यकालीन कवि उस्मान ने चित्रावली के अनुसार मंदिर के वातावरण में अनवरत योग साधना का क्रम चलता रहा है। गोरखनाथ मंदिर का भव्य निर्माण उसी पवित्र स्थान पर हुआ है जहां पर गुरु गोरखनाथ जी ने तपस्या की थी। उसके निकट का सरोवर जनमानस को आज भी प्रेरित करता है। गोरखनाथ मंदिर का रूप आकार प्रकार, समय-समय पर परिस्थितियों और सुविधाओं के अनुसार बदलता रहा है।

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akhand jyoti in gorakhnath temple

- शिव गोरक्ष की ओर से त्रेता युग में अखंड ज्योति जलाई गई थी, जो आज तक अखंड रूप से जलती जल कर रही है। यह अखंड ज्योति गोरखनाथ मंदिर के अंतरवर्ती भाग में हैं।

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