कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पुत्रवती महिलाएं अपनी संतान और परिवार को किसी भी अनहोनी से बचाने के लिए निर्जला व्रत रखती है और शाम को दीवार पर 8 कोनों वाली एक पुतली अंकित करती हैं। इसे अहोई अष्टमी भी कहा जाता है। पुतली के पास स्याऊ माता और उनके बच्चों को बनाया जाता है। इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर कच्चा भोजन खाया जाता है।
अहोई अष्टमी 2017: क्यों रखा जाता है ये व्रत, क्या है इसके पीछे की कथा?
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
Updated Thu, 12 Oct 2017 11:33 AM IST
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