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अहोई अष्टमी 2017: क्यों रखा जाता है ये व्रत, क्या है इसके पीछे की कथा?

Thu, 12 Oct 2017 11:33 AM IST
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह Updated Thu, 12 Oct 2017 11:33 AM IST
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ahoi ashtami 2017 know importance of ashtami and vrat katha
अहोई अष्टमी

कार्तिक माह में कृष्‍ण पक्ष की अष्टमी को पुत्रवती महिलाएं अपनी संतान और परिवार को किसी भी अनहोनी से बचाने के लिए निर्जला व्रत रखती है और शाम को दीवार पर 8 कोनों वाली एक पुतली अंकित करती हैं। इसे अहोई अष्टमी भी कहा जाता है। पुतली के पास स्याऊ माता और उनके बच्चों को बनाया जाता है। इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर कच्चा भोजन खाया जाता है।



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अहोई अष्टमी

इसके पीछे मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से संतान की आयु लंबी होती है। इसलिए देश के कई भागों में इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस पूजा के पीछे एक प्राचीन कथा है।

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अहोई अष्टमी

कथा के अनुसार एक साहूकार था। उसकी बहुएं दीपावली की तैयारियां कर रही थीं। इसके लिए अपने घर को चमकाने के लिए पास के वन से मिट्टी ले गई। तभी मिट्टी काटते समय उनकी छोटी बहु के हाथों से कांटे वाले पशु साही के बच्‍चे की मृत्यु हो गई।

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अहोई अष्टमी

अपने बच्चे की मृत्यु से नाराज साही की मां ने बहु का श्राप दिया कि जिस तरह से उसका बच्चा उसे छोड़कर हमेशा के लिए चला गया, उसी तरह से उसकी कोख भी सूनी हो जाएगी। इस श्राप के बाद उसके सभी बच्चे मर गए।

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अहोई अष्टमी

अपने बच्चों को फिर से जीवित करने के लिए साहूकार की बहू ने साही और मां भगवती की पूजा- आराधना करना शुरू किया। जिससे उसकी सभी संतान फिर से जीवित हो गई। 

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