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जनेऊ से लेकर मांग में सिंदूर भरने तक का यह वैज्ञानिक कारण चौंकाने वाला है

Sat, 29 Aug 2015 09:37 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 29 Aug 2015 09:37 AM IST
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जनेऊ से लेकर मांग में स‌िंदूर भरने तक का यह वैज्ञान‌िक कारण चौंकाने वाला है

20 Amazing Scientific Reasons Behind Hindu Traditions

रीति-रिवाज और परंपराएं हर किसी की व्यक्तिगत आस्था का सवाल होती हैं।

लेकिन हिंदू धर्म में बहुत सी ऐसे रीति-रिवाज हैं जिनके वैज्ञानिक आधार हैं।

जनेऊ से लेकर मांग में स‌िंदूर भरने तक का यह वैज्ञान‌िक कारण चौंकाने वाला है

20 Amazing Scientific Reasons Behind Hindu Traditions

हाथ जोड़कर नमस्कार करना हिंदू धर्म की प्राचीन परंपरा और सभ्यता है। दोनों हाथों को जोड़कर नमस्कार करने से आप सामने वाले को सम्मान भी देते हैं साथ ही इस क्रिया के वैज्ञानिक महत्व के कारण आपको शारीरिक लाभ भी मिल जाता है। जब हम दोनों हाथों को आपस में जोड़ते हैं तो हमारी हथेलियों और उंगलियों के उन बिंदुओं पर दबाव पड़ता है जो आंख, नाक, कान, दिल आदि शरीर के अंगों से सीधा संबंध रखते हैं। इस तरह दबाव पड़ने को एक्वा प्रेशर चिकित्सा भी कहते हैं। इस तरह नमस्कार करने से हम सामने वाले के स्पर्श में भी नहीं आते हैं, जिससे किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता है।

जनेऊ से लेकर मांग में स‌िंदूर भरने तक का यह वैज्ञान‌िक कारण चौंकाने वाला है

20 Amazing Scientific Reasons Behind Hindu Traditions

पैर की उंगली में रिंग पहनना भारतीय संस्कृति का हिस्सा तो है ही, लेकिन इसके वैज्ञानिक फायदे भी है। अमूमन रिंग को पैर के अंगूठे के बगल वाली दूसरी उंगली में धारण किया जाता है। इस उंगली की नस महिलाओं के गर्भाशय और दिल से संबंध रखती हैं। पैर की उंगली में रिंग पहनने से गर्भाशय और दिल से संबंधित बीमारियों की गुंजाइश नहीं रहती है। साथ ही चांदी की रिंग पहनना ज्यादा ठीक होता है। चांदी ध्रुवीय ऊर्जा से शरीर को ऊर्जावान बना देती है।

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20 Amazing Scientific Reasons Behind Hindu Traditions

पुराने समय में तांबे के सिक्के हुआ करते थे जिनकी जगह आज स्टेनलैस स्टील के सिक्कों ने ले ली है। तांबा पानी को शुद्ध करता है। इसलिए पुराने में समय में नदियां में तांबे के सिक्के इसलिए डाले जाते थे, क्योंकि ज्यादातर नदियां ही पीने के पानी का श्रोत हुआ करती थीं।

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दोनों भौहों के बीच माथे पर तिलक लगाने से उस बिंदू पर दवाब पड़ता है जो हमारे तंत्रिका तंत्र का सबसे खास हिस्सा माना जाता है। तिलक लगाने से इस खास हिस्से पर दबाव पड़ते ही ये सक्रिय हो जाता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होने लगता है। तिलक लगाने से एकाग्रता में बढ़ोतरी होती है। चेहरे की मांसपेशियों में रक्त का संचार भी सही से होता है।

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