Vrishabha Sankranti Significance: हिंदू पंचांग के अनुसार वृषभ संक्रांति का पर्व एक अत्यंत शुभ और पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष को छोड़कर वृष राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के इस गोचर को धार्मिक ग्रंथों में संक्रांति कहा गया है और जब यह गोचर वैशाख मास में होता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
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वृषभ संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, व्रत, दान और सूर्य उपासना करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन गंगा आदि तीर्थों में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्य को अर्घ्य देने से आयु, आरोग्य और तेज में वृद्धि होती है।
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इस दिन बनने वाले शुभ योग व्रत और पूजा-पाठ को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। यही कारण है कि वृषभ संक्रांति को साल के विशेष पुण्य कालों में एक माना जाता है और इसे धर्म, आस्था और आध्यात्मिक जागरण का पर्व माना जाता है।
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Vrishabha Sankranti 2025
- फोटो : adobe stock
वृषभ संक्रांति 2025 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, 15 मई 2025 को सूर्य देव अपनी वर्तमान राशि मेष से निकलकर वृष राशि में प्रवेश करेंगे। यह गोचर रात 12 बजकर 11 मिनट पर होगा, जिसके साथ ही वृषभ संक्रांति का शुभ पर्व आरंभ हो जाएगा। सूर्य वृष राशि में 14 जून तक रहेंगे और 15 जून को मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।
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वृषभ संक्रांति 2025 के शुभ मुहूर्त
पुण्य काल: सुबह 05:57 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
महा पुण्य काल: सुबह 05:30 बजे से 07:46 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक
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वृषभ संक्रांति के शुभ योग
इस दिन सुबह 07:02 बजे तक शिव योग रहेगा। इसके बाद पूरी रात सिद्ध योग और भद्रावास योग का प्रभाव बना रहेगा, जो दान और पुण्य कर्मों के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं।
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पूजा के विशेष मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:07 – 04:49
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:33 – 03:28
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:04 – 07:25
निशिता मुहूर्त: रात 11:57 – 12:38