Somvati Amavasya 2024 Date: सोमवती अमावस्या का पवित्र पर्व तब मनाया जाता है जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है। इसे सोमवती अमावस्या या सोमवारी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत के पालन से सौभाग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व भी होता है।
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Somvati Amavasya 2024: साल की अंतिम सोमवती अमावस्या कब? जानें शुभ योग और स्नान-दान मुहूर्त
Wed, 04 Dec 2024 11:27 AM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 04 Dec 2024 11:27 AM IST
सार
सोमवती अमावस्या का पवित्र पर्व तब मनाया जाता है जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है। इसे सोमवती अमावस्या या सोमवारी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।
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2024 की अंतिम सोमवती अमावस्या की तिथि
- फोटो : Amar Ujala
सोमवती अमावस्या
- फोटो : freepik
स्नान और दान का शुभ मुहूर्त
30 दिसंबर को ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5:24 से 6:19 बजे तक रहेगा। इसे स्नान के लिए बहुत ही शुभ समय माना जाता है। इसके अलावा सूर्योदय के समय भी स्नान कर सकते हैं। स्नान के उपरांत दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इससे जीवन की कई मुश्किलें कम हो जाती हैं।
30 दिसंबर को ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5:24 से 6:19 बजे तक रहेगा। इसे स्नान के लिए बहुत ही शुभ समय माना जाता है। इसके अलावा सूर्योदय के समय भी स्नान कर सकते हैं। स्नान के उपरांत दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इससे जीवन की कई मुश्किलें कम हो जाती हैं।
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पूजा का शुभ समय
- फोटो : freepik
पूजा का शुभ समय
इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए उपवास रखती हैं। इस दिन पूजा के लिए विशेष पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। स्नान-दान के पश्चात दिन में 12:03 से 12:45 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान आप भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद पा सकते हैं, जिससे आपका दांपत्य जीवन खुशहाल रहता है।
इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए उपवास रखती हैं। इस दिन पूजा के लिए विशेष पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। स्नान-दान के पश्चात दिन में 12:03 से 12:45 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान आप भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद पा सकते हैं, जिससे आपका दांपत्य जीवन खुशहाल रहता है।
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शुभ योग और नक्षत्र
- फोटो : freepik
शुभ योग और नक्षत्र
सोमवती अमावस्या के दिन वृद्धि योग सुबह से रात 8:32 बजे तक रहेगा, जिसके बाद ध्रुव योग शुरू हो जाएगा। इस दिन मूल नक्षत्र सुबह से रात 11:57 बजे तक रहेगा और इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा।
सोमवती अमावस्या के दिन वृद्धि योग सुबह से रात 8:32 बजे तक रहेगा, जिसके बाद ध्रुव योग शुरू हो जाएगा। इस दिन मूल नक्षत्र सुबह से रात 11:57 बजे तक रहेगा और इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा।
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सोमवती अमावस्या का महत्व
- फोटो : freepik
सोमवती अमावस्या का महत्व
सोमवती अमावस्या के दिन व्रत रखने से और शिव-पार्वती की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। सुहागिन स्त्रियां यह व्रत अपने पति की दीर्घायु के लिए करती हैं। इसके अलावा इस दिन पितरों की शांति के लिए श्राद्ध, पिंडदान, और तर्पण जैसे कार्य करने का भी विशेष महत्व है। पवित्र स्नान और दान से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
सोमवती अमावस्या के दिन व्रत रखने से और शिव-पार्वती की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। सुहागिन स्त्रियां यह व्रत अपने पति की दीर्घायु के लिए करती हैं। इसके अलावा इस दिन पितरों की शांति के लिए श्राद्ध, पिंडदान, और तर्पण जैसे कार्य करने का भी विशेष महत्व है। पवित्र स्नान और दान से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
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