सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत भगवान शिव और मां पार्वती के लिए रखा जाता है। मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन भगवान शिव की पूजा में कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद ही आवश्यक होता है। आप भी शिव पूजा में इन बातों का ध्यान जरूर रखें।
2 of 6
भगवान शिव
- फोटो : अमर उजाला
1. शिव पूजा में भगवान शिव को टूट हुए अक्षत भूलकर भी नहीं चढ़ाने चाहिए। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नही चढ़ाया जाता है। इसलिए पूजा में उपयोग होने वाले अक्षत साबूत होने चाहिए।
3 of 6
तुलसी का पौधा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
2. भगवान शिव को भूल से भी तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए। तुलसी को हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है और सभी तरह की पूजा और शुभ कार्यों में इसका प्रयोग होता है, लेकिन तुलसी को भगवान शिव पर चढ़ाना मना है। भगवान शिव को पूजा में बेल पत्र चढ़ाना चाहिए। तुलसी माता का संबंध भगवान विष्णु जी से है।
4 of 6
शंख (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
3. शिव उपासना में शंख का इस्तेमाल वर्जित माना गया है। दरअसल इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का भक्त था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है, इसलिए शिवजी की पूजा में शंख का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
5 of 6
कुमकुम (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
4. भोलेनाथ को कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए। कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक होता है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ना चाहिए। साथ ही शिवलिंग पर हल्दी भी न चढ़ाएं।