Sharad Purnima 2020 Kojagari Laxmi Puja 2020: सभी फसलों, वृक्षों और वनस्पतियों में अमृतवर्षा करने वाली पवित्र तिथि शरद पूर्णिमा का पर्व 30 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा का मान 31 अक्टूबर को भी है किंतु यह तिथि 30 अक्टूबर प्रदोष व्यापिनी तथा निशीथ व्यापिनी दोनों है इसलिए इस पूर्णिमा के दिन मध्यरात्रि में चंद्रमा द्वारा की जाने वाली अमृत वर्षा के लिए आवश्यक तिथि इसी दिन है अतः बगैर किसी संसय के शरद पूर्णिमा शुक्रवार को मनाएं। इस दिन अगस्त तारे के उदय और चंद्रमा की सोलह कलाओं की शीतलता का संयोग देखने लायक होता है। यह पूर्णिमा सभी बारह पूर्णिमाओं में सर्वश्रेष्ठ मानी गयी गई है।
Sharad Purnima 2020: चंद्रदोष और कर्ज से मुक्ति पाने का दिन है शरद पूर्णिमा
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इसी दिन भगवान कृष्ण महारास रचाना आरम्भ करते हैं। देवी भागवत महापुराण में कहा गया है कि गोपिकाओं के अनुराग को देखते हुए भगवान कृष्ण ने चन्द्र से महारास का संकेत दिया। चन्द्र ने भगवान कृष्ण का संकेत समझते ही अपनी शीतल रश्मियों से प्रकृति को आच्छादित कर दिया। उन्ही किरणों ने भगवान कृष्ण के चहरे पर सुंदर रोली कि तरह लालिमा भर दी ! फिर उनके अनन्य जन्मों के प्यासे बड़े बड़े योगी, मुनि, महर्षि और अन्य भक्त गोपिकाओं के रूप में कृष्ण लीला रूपी महारास ने समाहित हो गए, कृष्ण कि वंशी कि धुन सुनकर अपने अपने कर्मो में लीन सभी गोपियां अपना घर-बार छोड़कर भागती हुईं वहां आ पहुचीं।
Sharad Purnima 2020: सभी पूर्णिमा में क्यों खास मानी जाती है शरद पूर्णिमा, जानिए महत्व और तिथि
कृष्ण और गोपिकाओं का अद्भुत प्रेम देख कर चन्द्र ने अपनी सोममय किरणों से अमृत वर्षा आरम्भ कर दी जिसमे भीगकर यही गोपिकाएं अमरता को प्राप्त हुईं और भगवान कृष्ण के अमर प्रेम का भागीदार बनी। चंद्रमा की सोममय रश्मियां जब पेड़ पौधों और वनस्पतियों पर पड़ी तो उनमें भी अमृत्व का संचार हो गया। इसीलिए इस दिन खीर बना कर खुले आसमान के नीचे मध्यरात्रि में रखने का विधान है रात्रि में चन्द्र की किरणों से जो अमृत वर्षा होती है, उसके फलस्वरुप वह खीर भी अमृत सामान हो जाती है उसमें चन्द्रमा से जनित दोष शांति और आरोग्य प्रदान करने क्षमता स्वतः आ जाती है। यह प्रसाद ग्रहण करने से प्राणी मानसिक क्लान्ति से मुक्ति पा लेता है।
चंद्रदोष से मुक्ति पाने का दिन
जन्मकुंडली में चंद्रमा क्षीण हों, महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर्दशा चल रही हो या चंद्रमा छठवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो चन्द्र की पूजा और मोती अथवा स्फटिक माला से ॐ सों सोमाय मंत्र का जप करके चंद्रजनित दोषों से मुक्त हुआ जा सकता है। जिन्हें ब्लड प्रेशर हो, पेट या ह्रदय सम्बंधित बीमारी हो, कफ़ नजला-जुखाम हो आखों से सम्बंधित बीमारी हो वे इसदिन चन्द्रमा की आराधना करके इन सब दुखों मुक्ति पा सकते हैं। जिन विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में न लगता हो वे चन्द्र यन्त्र धारण करके परीक्षा अथवा प्रतियोगिता में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। इस पूर्णिमा सभी प्रकार के ऋण रोग और दारिद्रता से मुक्ति दिलाने का सामर्थ्य है।
कर्ज से मुक्ति पाने का दिन
विजयादशमी के दिन व्रत पारणा के बाद भगवान विष्णु की परम प्रिय एकादशी के दिन प्राणियों की पूजा-आराधना का फल उनके कर्मों के आधार पर दिया जाता है। जिससे पाप कर्मो पर अंकुश लग जाता है इसीलिए इसे 'पापांकुशा' एकादशी भी कहते हैं। पापों पर अंकुश लगने के बाद पूर्णिमा को माता महालक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन होता है। वे घर-घर जाकर सबको वरदान देती हैं किन्तु जो लोग दरवाजा बंद करके सो रहे होते हैं वहाँ से लक्ष्मी जी दरवाजे से ही वापस चली जाती है। शास्त्रों में इसे कोजागर व्रत यानी कौन जाग रहा है व्रत भी कहते हैं। इसदिन की लक्ष्मी पूजा सभी कर्जों से मुक्ति दिलाती हैं इसीलिए इसे कर्जमुक्ति पूर्णिमा भी इसी लिए कहते हैं। इस रात्रि को श्रीसूक्त का पाठ,कनकधारा स्तोत्र ,विष्णु सहस्त्र नाम का जाप और भगवान कृष्ण का मधुराष्टकं का पाठ ईष्ट कार्यों की सिद्धि दिलाता है और उस भक्त को भगवान कृष्ण का सानिध्य मिलता है।