Sawan Somwar Puja Muhurat: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने में शिवलिंग पर जल अर्पित करना, व्रत रखना और मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी होता है। साल 2025 में सावन की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है। इस दौरान शिव भक्तों के लिए चार सावन सोमवार का व्रत रखने का विशेष अवसर रहेगा।
{"_id":"68665c2272012499d3069a38","slug":"sawan-first-somwar-2025-date-puja-muhurat-jal-abhishek-time-tithi-sawan-ka-pehla-somar-kab-hai-2025-07-03","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Sawan Somwar 2025: पहला सावन सोमवार कब है? जानें तिथि, मुहूर्त और जलाभिषेक समय","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Sawan Somwar 2025: पहला सावन सोमवार कब है? जानें तिथि, मुहूर्त और जलाभिषेक समय
Thu, 03 Jul 2025 04:08 PM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Thu, 03 Jul 2025 04:08 PM IST
सार
Sawan Somvar: साल 2025 में सावन की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है, और पहला सावन सोमवार 14 जुलाई को पड़ेगा। इस दौरान भगवान शिव की पूजा और व्रत से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने का विश्वास है, विशेषकर कुंवारी कन्याओं के लिए यह समय बेहद शुभ माना जाता है।
विज्ञापन
साल 2025 में सावन की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है।
- फोटो : अमर उजाला
इस बार सावन का पहला सोमवार, यानी प्रथम श्रावणी सोमवार, 14 जुलाई 2025 को पड़ रहा है।
- फोटो : freepik
कब है पहला व्रत और क्यों है इतना खास?
श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस पूरे महीने शिव जी धरती पर वास करते हैं और अपने भक्तों की पुकार पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इसीलिए श्रावण के सोमवार को किया गया व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इस बार सावन का पहला सोमवार, यानी 'प्रथम श्रावणी सोमवार', 14 जुलाई 2025 को पड़ रहा है। इस दिन अगर कोई व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से भगवान शिव की पूजा करता है, तो शिवजी उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। 3यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ होता है जो जीवन में किसी विशेष लक्ष्य की प्राप्ति या समस्याओं से मुक्ति की कामना करते हैं। ऐसी आस्था है कि सावन का पहला सोमवार पूरे महीने की साधना का शुभ आरंभ होता है, इसलिए इस दिन की गई पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस पूरे महीने शिव जी धरती पर वास करते हैं और अपने भक्तों की पुकार पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इसीलिए श्रावण के सोमवार को किया गया व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इस बार सावन का पहला सोमवार, यानी 'प्रथम श्रावणी सोमवार', 14 जुलाई 2025 को पड़ रहा है। इस दिन अगर कोई व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से भगवान शिव की पूजा करता है, तो शिवजी उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। 3यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ होता है जो जीवन में किसी विशेष लक्ष्य की प्राप्ति या समस्याओं से मुक्ति की कामना करते हैं। ऐसी आस्था है कि सावन का पहला सोमवार पूरे महीने की साधना का शुभ आरंभ होता है, इसलिए इस दिन की गई पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
पहले सोमवार की पूजा के लिए शुभ समय
- फोटो : freepik
पहले सोमवार की पूजा के लिए शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:16 बजे से लेकर 5:04 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:58 तक
- अमृत काल: दोपहर 12:01 से 1:39 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 5:38 से 7:22 बजे तक
विज्ञापन
विज्ञापन
पूजा की शुरुआत करने से पहले दाहिने हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
- फोटो : freepik
सावन सोमवार की पूजा विधि
- सावन सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त यानी सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करके शरीर और मन को शुद्ध करें। स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें, विशेषतः सफेद या पीले रंग को शुभ माना जाता है। इसके बाद अपने घर के पूजा स्थान की सफाई करें और वहां गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करें।
- भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र पूजा स्थल पर रखें। एक थाली में पूजा की सारी सामग्री जैसे फूल, अक्षत (चावल), जल, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, भस्म, फल और मिठाई आदि सजा लें। दीपक और अगरबत्ती भी तैयार रखें।
- पूजा की शुरुआत करने से पहले दाहिने हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
- अब आप शिवलिंग का अभिषेक करें। पहले गंगाजल से स्नान कराएं, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत अर्पित करें। पुनः गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और फूल अर्पित करें। भगवान गणेश और माता पार्वती की भी पूजा करें।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। चाहें तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव पुराण का पाठ करना भी अत्यंत पुण्यकारी होता है। धूप-दीप दिखाकर शिवजी की आरती करें।
- भगवान को फल, मिठाई या जो भी आप बना सकें वह अर्पित करें। आरती के बाद सभी परिजनों में प्रसाद बांटें।
- अगर आपने निर्जल व्रत रखा है, तो अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें। उस दिन सात्विक भोजन करें और जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।