Sawan First Somvar 2025: हर साल की तरह इस बार भी सावन कई शुभ योग के साथ प्रारंभ हो गया है। यह माह 11 जुलाई 2025 से 9 अगस्त तक रहने वाला है। इस दौरान शिव भक्तों को चार सोमवार प्राप्त होंगे, जिनमें पहला सावन सोमवार आज यानी 14 जुलाई 2025 को है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से आर्थिक लाभ की प्राप्ति होती हैं। यही नहीं प्रेम जीवन में चल रही अनबन भी समाप्त होने लगती हैं। यह दिन कन्याओं के लिए और भी खास होता है, क्योंकि सावन सोमवार व्रत रखने पर योग्य वर की कामना पूर्ण होती हैं।
Shiv Ji ki Aarti: सावन के पहले सोमवार पर इन आरती मंत्रों से करें भगवान शिव को प्रसन्न, पूरी होंगी सभी इच्छाएं
Shiv Aarti in Hindi: शास्त्रों के मुताबिक सावन में ही भोलेनाथ ने देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। तभी से यह समय तप-तपस्या और महाकाल को प्रसन्न करने के लिए शुभ माना जाता है।
शिव जी की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
ऊँ नम: शिवाय।।
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।