Sawan 3rd Somwar 2024: सावन का तीसरा सोमवार व्रत आज यानी 5 अगस्त 2024 को रखा जा रहा है। ये दिन देवों के देव महादेव को अति प्रिय है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में खुशियों का वास होता है। साथ ही सभी बिड़गे कार्य भी बनने लगते हैं। ऐसे में महादेव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक व अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने पर मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती है। साथ ही धन लाभ के योग बनते हैं।
Sawan Somwar 2024: शुभ योग में सावन का तीसरा सोमवार आज, इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा
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पूजन विधि
सावन के तीसरे सोमवार पर सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। फिर साफ वस्त्रों को धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर जाकर सबसे पहले विधिपूर्वक भगवान शिव का अभिषेक करें। फिर उन्हें फल, पुष्प, धूप, बेलपत्र, अक्षत आदि चीजें अर्पित करते जाएं। इसके बाद घी का दीपक जलाएं।
सभी चीजों को अर्पित करने के बाद अंत में शिव जी की आरती करें। इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर महादेव से सुख-समृद्धि की कामना करें। इस दौरान दान करना अधिक शुभ होता है। आप अपनी श्रद्धानुसार जरूरतमंद लोगों को दान करें।
अर्पित करें ये चीजें
सावन के तीसरे सोमवार पर शिवलिंग पर शहद चढ़ाना चाहिए। इससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा बेलपत्र चढ़ाने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति के योग बनते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव को शुद्ध घी, गंगाजल, धतूरा, चंदन और फल जरूर अर्पित करना चाहिए।
जरूर करें ये 3 उपाय
भगवान शिव की आरती
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
ऊँ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ऊँ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ऊँ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥
ऊँ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ऊँ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ऊँ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ऊँ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥
ऊँ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ऊँ जय शिव...॥
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥