Roop Chaudas 2020: रूप चौदस को क्यों कहा जाता है छोटी दिवाली, जानिए कथा और महत्त्व
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Roop Chaudas 2020: रूप चौदस को छोटी दीपावली के नाम से जाना जाता है। यह दिवाली के दिन पहले का त्योहार है। इस साल रूप चौदस या का त्योहार 13 नवंबर को मनाया जाएगा। दिवाली के पांच दिनों के त्यौहार में यह धन तेरस के बाद आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो व्यक्ति मृत्यु के देवता यमराज पूजा करता है उसको जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है। रूप चौदस पर यमराज के लिए दीप भी जलाए जाते है। रूप चौदस का महत्त्व इस दिन सुबह स्नान करके यमराज की पूजा और शाम के समय दीप दान करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
नरकासुर का हुआ था वध
एक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कराया था तब से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा के सहयोग से श्री कृष्ण ने इन सभी कन्याओं से विवाह कर लिया।
आज के दिन इसलिए खिलाया जाता है ब्राह्मणों को भोजन
वहीं एक दूसरी मान्यता के अनुसार जब रंती देव नामक राजा के मृत्यु का समय समीप आया तो यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को देखकर राजा बोले मैंने तो अपने जीवन में कभी कोई पाप नहीं किया। ऐसे में फिर स्वर्ग की जगह नर्क क्यों चलने के लिए कहा जा रहा है। तब यमदूत ने कहा कि एक बार आपने दरवाजें पर भूखे ब्राह्राण को खाली हाथ लौटा दिया था यह उसी पाप का नतीजा है। इसके बाद राजा ने अपने पापों का प्राश्यचित करने के लिए यमदूत से एक वर्ष का समय मांगा और फिर ऋषियों से इस पाप को दूर करने का उपाय पूछा। उनको आज के दिन का व्रत कर ब्राह्मणों को भोजन कराने को कहा गया। ऐसा करने के बाद राजा को विष्णु लोक में स्थान मिला।