Raksha Bandhan Mythological Reasons: इस साल रक्षाबंधन का पावन त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक होता है, जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है, वहीं भाई जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देता है। हिंदू धर्म में रक्षाबंधन को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जैसे सही मुहूर्त में राखी बांधना, भद्राकाल में राखी न बांधने की मनाही, और यह परंपरा कि बहन खुद भाई के घर जाकर राखी बांधे।
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हालांकि, समय और परिस्थिति के अनुसार कई बार बहनें अपने मायके नहीं आ पातीं, ऐसे में कुछ परिवारों में भाई खुद बहन के घर जाकर राखी बंधवाते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसे उचित नहीं माना जाता। धार्मिक दृष्टिकोण से राखी का महत्व तभी पूर्ण होता है जब बहन अपने हाथों से भाई की कलाई पर राखी बांधे और उसे तिलक कर आशीर्वाद दे। इसलिए पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि रक्षाबंधन पर भाई को बहन के घर जाने से बचना चाहिए।
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Raksha Bandhan
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रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा
रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के वचन का प्रतीक है। यह केवल एक पारिवारिक उत्सव नहीं, बल्कि इसकी जड़ें प्राचीन पौराणिक कथाओं में भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण कथा दानवों के पराक्रमी राजा बली और भगवान विष्णु से संबंधित है, जो रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करती है।
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कठोर तप करके भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया।
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दानवराज बली ने मांगा अमरत्व का वरदान
पुराणों के अनुसार, दानवों के राजा बली एक महान भक्त और तपस्वी थे। उन्होंने कठोर तप करके भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने बली को अमरत्व और तीनों लोकों पर अधिकार का वरदान दे दिया। इस शक्ति से दानवों की स्थिति मजबूत हो गई और देवताओं को चिंता सताने लगी कि राजा बली इतनी शक्ति का दुरुपयोग कर सकता है।
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भगवान विष्णु ने धरती पर वामन रूप में अवतार लिया।
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देवताओं की चिंता और भगवान विष्णु का वामन अवतार
देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने धरती पर वामन रूप में अवतार लिया। वे एक छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बली के यज्ञ में पहुंचे और उससे तीन पग भूमि दान में मांगी। बली, जो अपने दान के लिए प्रसिद्ध था, बिना संकोच यह भिक्षा देने के लिए तैयार हो गया।
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उन्होंने पहले पग में स्वर्ग लोक, दूसरे पग में पृथ्वी लोक को नाप लिया।
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तीन पग में नाप लिए तीनों लोक
जैसे ही बली ने वामन की मांग को स्वीकार किया, भगवान विष्णु ने अपना विराट रूप धारण कर लिया। उन्होंने पहले पग में स्वर्ग लोक, दूसरे पग में पृथ्वी लोक को नाप लिया। तीसरे पग के लिए कोई स्थान न बचने पर, राजा बली ने समझ लिया कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु हैं। उसने श्रद्धा भाव से अपना सिर उनके सामने झुका दिया, ताकि भगवान तीसरा पग वहाँ रख सकें।