Som Pradosh Vrat May 2021: सोम प्रदोष व्रत आज है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानी संध्या के समय की जाती है। यह व्रत फलाहार या निर्जला रहकर किया जाता है। जानते हैं सोम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त, महत्व और व्रत पूजा विधि।
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Som Pradosh Vrat May 2021: सोम प्रदोष व्रत आज, सौभाग्य प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजा
Mon, 24 May 2021 07:13 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रुस्तम राणा
Updated Mon, 24 May 2021 07:13 AM IST
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pradosh vrat
सोम प्रदोष व्रत 2021
- फोटो : अमर उजाला
सोम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि आरंभ - 24 मई 2021 तड़के 03 बजकर 38 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त - 25 मई 2021 रात 12 बजकर 11 मिनट
पूजा का समय - शाम 07 बजकर 10 मिनट से रात 09 बजकर 13 मिनट तक
त्रयोदशी तिथि आरंभ - 24 मई 2021 तड़के 03 बजकर 38 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त - 25 मई 2021 रात 12 बजकर 11 मिनट
पूजा का समय - शाम 07 बजकर 10 मिनट से रात 09 बजकर 13 मिनट तक
प्रदोष व्रत पूजा विधि
- फोटो : Social media
प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत करने के लिए त्रयोदशी के दिन जल्दी सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें। भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जपें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए प्रदोषकाल में भगवान शिव को शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं।
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भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social media
भगवान शिव के मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ नमः शिवाय। ॐ आशुतोषाय नमः।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ नमः शिवाय। ॐ आशुतोषाय नमः।
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प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
- फोटो : Social media
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है। मान्यता है कि प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है शाप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था। जिसके शुभ प्रभाव से चंद्रदेव को क्षय रोग से मुक्ति मिली थी।