{"_id":"584a92084f1c1b2434449ed4","slug":"mokshada-ekadashi-vrat-katha-importance","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"मोक्ष की चाहत रखने वालों के लिए साल की सबसे खास एकादशी","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
मोक्ष की चाहत रखने वालों के लिए साल की सबसे खास एकादशी
Fri, 09 Dec 2016 05:20 PM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Fri, 09 Dec 2016 05:20 PM IST
विज्ञापन
1 of 7
महाभ्ाारत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
मृत्यु जीवन का अंत नहीं है जो मरता है उसे वापस कर्मों के अनुसार जन्म लेना पड़ता है। लेकिन जिस मोक्ष मिल जाता है वह फिर जन्म नहीं लेता ऐसा गीता में कहा गया है। मार्गशीर्ष एकादशी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने यह बात अर्जुन को बतायी थी। इसलिए इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। मोक्ष की चाहत रखने वालों को इस एकादशी का व्रत रखना चाहिए ऐसा शास्त्रों में बताया गया है। इस एकादशी के बारे में शास्त्रों पुराणों में और भी बहुत कुछ कहा गया है जान लीजिए।
मोक्ष की चाहत रखने वालों के लिए साल की सबसे खास एकादशी
2 of 7
महाभारत गीता उपदेश
इस एकादशी की कथा का उल्लेख करते हुए पद्म पुराण में बताया गया है कि वैखानस नाम के राजा को स्वप्न में उनके मृत पिता ने बताया कि वह नर्क भोग रहे हैं और उन्हें कष्ट से मुक्त कराएं। ऐसे में जब राजा वैखानस पर्वत ऋषि के पास समस्या का समाधान लेकर आए तो ऋषि ने अंतदृष्टि से पता किया कि राजा के पिता अपने पूर्व जन्म में एक पत्नी के प्रेम में इतने डूब गए कि दूसरी पत्नी का उन्हें ख्याल ही नहीं रहा।
मोक्ष की चाहत रखने वालों के लिए साल की सबसे खास एकादशी
3 of 7
भगवान विष्णु
राजा के पिता ने अपनी दूसरी पत्नी को विरह की आग में जलने के लिए छोड़ दिया था। पति प्रेम से वंचित पत्नी की आहों के कारण वैखानस के पिता को नर्क भोगना पड़ रहा है। पर्वत ऋषि ने बताया कि इस समस्या का सामधान यह है कि तुम मोक्षदा एकादशी का व्रत रखकर इसका पुण्य अपने पिता को दे दो।
विज्ञापन
विज्ञापन
मोक्ष की चाहत रखने वालों के लिए साल की सबसे खास एकादशी
4 of 7
विष्णु शिव
राजा वैखानस ने मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा और द्वादशी के दिन पारण करके इसका पुण्य अपने पिता को दे दिया। इस इस पुण्य से राजा के पिता स्वर्ग चले गए और कुछ समय बाद उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो गई। इस एकादशी के दिन गीता पाठ का बड़ा महत्व है।
विज्ञापन
मोक्ष की चाहत रखने वालों के लिए साल की सबसे खास एकादशी
5 of 7
नारद विष्णु भगवान
भगवान श्री कृष्ण ने इसी एकादशी के दिन गीता का ज्ञान दिया था इसलिए इस दिन गीता पाठ का बड़ा महत्व है। श्रीमद्भगवद्गीता में अठारह अध्याय हैं। गीता के ग्यारहवें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण के द्वारा अर्जुन को विश्वरूप के दर्शन का वर्णन किया गया है। इस अध्याय में बताया गया है कि अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण को संपूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त देखा। श्री कृष्ण में ही अर्जुन ने भगवान शिव, ब्रह्मा एवं जीवन मृत्यु के चक्र को भी देखा।
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।