महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए एक बहुत बड़ा त्योहार है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही देवी पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। वहीं शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि पर सृष्टि का आरंभ हुआ था। इन दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष रूप से पूजा-आराधना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त महाशिवरात्रि के दिन शिवमंदिरों और ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर शिवलिंग पर जल चढ़ाता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। देश में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं। इस महाशिवरात्रि के मौके पर आइए जानते हैं इन सभी ज्योतिर्लिंगों का महत्व...
2 of 13
सोमनाथ मंदिर
- फोटो : Social Media
सोमनाथ- सोमनाथ को भारत में स्थित सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पुराना और पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में है। शिवपुराण के अनुसार इसी जगह पर चंद्रमा को श्राप से मुक्ति मिली थी। श्राप से मुक्ति मिलने के बाद स्वयं चंद्रदेव ने इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की थी। इस मंदिर को 17 बार विदेशी अक्रांताओं ने नष्ट किया था।
मल्लिकार्जुन- यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश के कृष्ण नदी के समीप श्रीलैश पर्वत पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है जितना महत्व कैलाश है उसी तरह इसका भी महत्व है। इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
महाकालेश्वर- यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में स्थित है। यह एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है। महाकाल की भस्मारती विश्व भर में प्रसिद्ध है। महाकाल की पूजा करने से आयु से संकट टल जाता है और व्यक्ति की आयु बढ़ जाती है।
ओंकारेश्वर- यह मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के समीप स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग ऊं के आकार लिए हुए है इस कारण से इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है।