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Lathmar Holi: कब है बरसाने की लट्ठमार होली? जानें कैसे हुई इस परंपरा की शुरुआत

Fri, 28 Feb 2025 12:56 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 28 Feb 2025 12:56 PM IST
सार

Lathmar Holi Kab Hai: बरसाने की लट्ठमार होली पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। बता दें कि इस परंपरा की शुरुआत भगवान कृष्ण और राधा रानी ने की थी। ऐसे में आइए जानते हैं कि किस दिन बरसाने की लट्ठमार होली खेली जाएगी। लट्ठमार होली सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम कहानी की झलक है।

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Lathmar Holi 2025 in Barsana Date Importance and How This Tradition Begin Barsane Me Lathmar Holi Kab Hai
लट्ठमार होली 2025 - फोटो : amar ujala

Barsana Mein Lathmar Holi Kab Hai: भारत में होली का त्योहार अत्यधिक उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हर राज्य में इसे अपने विशेष तरीके से मनाने की परंपरा है। कहीं लट्ठमार होली खेली जाती है, तो कहीं फूलों और अबीर के साथ। कुछ स्थानों पर मसान की होली प्रसिद्ध है, जबकि अन्य जगहों पर इसे रंग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। बरसाना में लट्ठमार होली का विशेष महत्व है, और यह त्योहार पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। कई विदेशी पर्यटक भी इस अद्वितीय अनुभव का हिस्सा बनने के लिए यहां आते हैं। मथुरा की होली तो पूरे देश में सबसे अधिक प्रसिद्ध है, जहां लोगों में एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है।



ब्रज क्षेत्र में होली की शुरुआत वसंत पंचमी के दिन से होती है, जो लगभग 40 दिनों तक चलती है। इस उत्सव के दौरान लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को रंग और अबीर लगाते हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन में होली का जश्न विशेष रूप से मनमोहक होता है।

बरसाने की लट्ठमार होली पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। बता दें कि इस परंपरा की शुरुआत भगवान कृष्ण और राधा रानी ने की थी। ऐसे में आइए जानते हैं कि किस दिन बरसाने की लट्ठमार होली खेली जाएगी। लट्ठमार होली सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम कहानी की झलक है। यह त्योहार रंगों, उल्लास और भाईचारे का प्रतीक है। अगर आप होली को असली ब्रज वाले अंदाज में देखना चाहते हैं, तो एक बार बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली जरूर देखें।

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Lathmar Holi 2025 in Barsana Date Importance and How This Tradition Begin Barsane Me Lathmar Holi Kab Hai
लट्ठमार होली 2025 - फोटो : amar ujala

कब है लट्ठमार होली?
ब्रज में होली का उत्सव लगभग 40 दिनों तक चलता है, लेकिन लट्ठमार होली सबसे विशेष होती है। फाल्गुन महीने की नवमी तिथि की शुरुआत 7 मार्च को सुबह 9:18 से होगी, जिसका समापन 8 मार्च को सुबह 8:16 पर होगा। ऐसे में उदयातिथि को 8 मार्च को लट्ठमार होली मनाई जाएगी।

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लट्ठमार होली 2025 - फोटो : amar ujala

क्यों खास है लट्ठमार होली?
हर साल होली के पहले मथुरा और बरसाने के गांवों में लट्ठमार होली का आयोजन किया जाता है। इस उत्सव में नंदगांव के पुरुष (हुरियारे) और बरसाने की महिलाएं (हुरियारिन) भाग लेते हैं। पुरुष ढाल लेकर आते हैं, जबकि महिलाएं लाठियों से उन पर प्रहार करती हैं। इस दौरान विशेष ब्रज गीत गाए जाते हैं और चारों ओर रंगों की छटा बिखरती है। इस खास मौके पर भांग और ठंडाई का आनंद लिया जाता है। पूरे गांव में कीर्तन मंडलियां घूमती हैं और श्रीकृष्ण-राधा के भजन गाए जाते हैं।

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लट्ठमार होली 2025 - फोटो : Adobe stock

कैसे शुरू हुई लट्ठमार होली?
यह परंपरा राधा और कृष्ण के प्रेम की कथा से जुड़ी हुई है। प्राचीन कहानियों के अनुसार, भगवान कृष्ण नंद के गांव में रहते थे, जबकि राधा बरसाना में थीं। एक बार, कृष्ण जी राधा से मिलने बरसाना पहुंचे, जहां उन्होंने राधा और उनकी सखियों को चिढ़ाना शुरू कर दिया। इससे नाराज होकर राधा रानी अपनी सखियों के साथ मिलकर कृष्ण जी और ग्वालों को लाठी से पीटने लगीं। इसी घटना के बाद से बरसाना और नंद गांव में लट्ठमार होली की परंपरा की शुरुआत हुई। तब से यहां महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारने का खेल खेलती हैं, जबकि पुरुष खुद को बचाने की कोशिश करते हैं और इस लट्ठमार होली का आनंद लेते हैं। इस अवसर पर रंगों के साथ-साथ फूलों की होली भी मनाई जाती है।

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लट्ठमार होली 2025 - फोटो : Adobe stock

कैसे खेली जाती है लट्ठमार होली?
लट्ठमार होली के अवसर पर नंदगांव के युवक सिर पर साफा और कमर में फेंटा बांधकर ढाल लेकर आते हैं। वहीं, बरसाने की महिलाएं अपने चेहरों को पल्लू से ढककर लाठियां चलाती हैं। यदि किसी हुरियारे को लठ लग जाता है, तो उसे मजाक के तौर पर महिलाओं के कपड़े पहनकर नाचना पड़ता है। यह सब हंसी-मजाक के माहौल में होता है, जिसमें किसी को चोट नहीं आती।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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