Krishna Janmashtami 2023 भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। श्री कृष्ण का अष्टमी तिथि में जन्म होने के कारण इस पर्व को जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस बार जन्माष्टमी का त्योहार 6 और 7 सितंबर को मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर भगवान श्री कृष्ण के कुछ संदेशों के बारे में जानते हैन। श्री कृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से समस्त संसार को गीता का अमृत संदेश दिया था। श्रीमद् भागवत गीता के माध्यम से मनुष्य विषम से विषम परिस्थितियों में सही मार्गदर्शन प्राप्त करता है। इस बार कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर हम गीता के 5 ऐसे श्लोक के बारे में बता रहे हैं जो आपके जीवन में बदलाव लाने में मदद करेंगे
जन्माष्टमी विशेष: गीता के 5 श्लोक, इनका रोज पाठ जीवन में लाएगा बदलाव
नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत ॥
अर्थ : आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग उसे जला सकती है। न पानी उसे भिगो सकता है, न हवा उसे सुखा सकती है।
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अर्थ: कर्म करने मात्र में तुम्हारा अधिकार है, फल में कभी नहीं। तुम कर्मफल के हेतु वाले मत होना और अकर्म में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
अर्थ: विषयों वस्तुओं के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है। इससे उनमें कामना यानी इच्छा पैदा होती है और कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है।
क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
अर्थ: क्रोध से मनुष्य की मति मारी जाती है यानी मूढ़ हो जाती है जिससे स्मृति भ्रमित हो जाती है। स्मृति-भ्रम हो जाने से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि का नाश हो जाने पर मनुष्य खुद का अपना ही नाश कर बैठता है।