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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Vishwakarma Jayanti 2026 Date 17 September Know Vishwakarma Puja Vidhi Subh Muhurat and Importance

विश्वकर्मा पूजा 2026: क्यों होती है इस दिन औजारों और कारखानों की पूजा ? जानें पूजन शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Wed, 16 Sep 2026 08:23 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 16 Sep 2026 08:23 PM IST
सार

17 सितंबर को कन्या संक्रांति है और इस दिन भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाती है। इस दिन विशेष तौर पर औजारों, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों, कारखानों आदि की पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा जी को यंत्रों का देवता भी माना गया है।

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Vishwakarma Jayanti 2026 Date 17 September Know Vishwakarma Puja Vidhi Subh Muhurat and Importance
विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त और महत्व - फोटो : अमर उजाला AI

विस्तार

गुरुवार, 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष कन्या संक्रांति पर सृष्टि के सबसे बड़े शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा का प्राकट्य पर्व मनाया जाता है। सूर्य जब सिंह राशि की अपनी यात्रा को विराम देते हुए कन्या राशि में प्रवेश करते हैं उसे कन्या संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन सृष्टि के वास्तु और शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने का विशेष विधान होता है। विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा के साथ, मशीनों, औजारों, वाहनों, कारखानों और कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाली चीजों की पूजा होती है। 

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विश्वकर्मा पूजा तिथि 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर, गुरुवार के दिन है।
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विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त 2026

सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त- 07 बजकर 58 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक।
दोपहर की पूजा का शुभ मुहूर्त- 12 बजकर 15 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 48 मिनट तक।
शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त- 4 बजकर 52 मिनट से लेकर 06 बजकर 24 मिनट तक।

इन तीनों मुहूर्त में आप अपने फैक्ट्री, वाहन और औजारों की पूजा कर सकते हैं।

इस समय विश्वकर्मा पूजा करने से बचें
दिन में राहुकाल के समय को अशुभ माना जाता है। 17 सितंबर को राहुकाल के दौरान पूजा करने से बचना चाहिए। 17 सितंबर को राहुकाल दोपहर 01 बजकर 48 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ऐसे में अवधि में शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। 
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जानिए कौन है भगवान विश्वकर्मा ?
शास्त्रों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के पहले शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर हैं। ऐसी मान्यता है कि जब ब्रम्हा जी ने सृष्टि की रचना की तो निर्माण का कार्य भगवान विश्वकर्मा जी को सौपा था। तब ब्रह्मा जी के आदेश पर ही भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि की कई चीजों की रचना की थी, जिसमें इंद्रपुरी, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका और हस्तिनापुर, कलयुग में जगन्नाथपुरी आदि का निर्माण किया था। इसके अलावा  सुदर्शन चक्र, शिव जी का त्रिशूल, पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज को भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था। 


विश्वकर्मा पूजा का महत्व
इस दिन सभी कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में लगी हुई मशीनों की पूजा की जाती है।इस दिन वाहन पूजा का भी विधान है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं साथ ही व्यापार में तरक्की और उन्नति प्राप्त होती है।इनकी पूजा करने से व्यक्ति में नई ऊर्जा का संचार होता है और व्यापार या निर्माण आदि जैसे कार्यों में आने वाली मशीनें,वाहन आदि कभी खराब नहीं होते हैं।

विश्वकर्मा पूजाविधि

  • प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा का संकल्प लें।
  • फिर कार्यक्षेत्र में औजारों, मशीन आदि की सफाई करके विश्वकर्मा जी की प्रतिमा या चित्र लगाकर रोली,अक्षत,फल-फूल आदि से उनकी पूजा करें। 
  • सभी औजारों और मशीनों के कलावा बांधें एवं मिठाई से पूजा करते हुए उनकी आरती करें। 
  • पूजा के दौरान “ॐ विश्वकर्मणे नमः” मंत्र का उच्चारण करें।
  • इसके बाद सभी को प्रसाद बांटें।
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