ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि अर्थात् 30 मई को सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। हिंदू पंचांग में त्रयोदशी को सौभाग्यदायक तिथि माना गया है। तमाम कार्यों के लिए शुभ मानी जाने वाली इस तिथि पर भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा करने पर उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन से जुड़ी बाधाएं और दोष दूर हो जाते हैं। शिव-पार्वती की कृपा से सुख और सौभाग्य प्राप्त होता है।
जानें साल 2019 में कब-कब पड़ेगा प्रदोष व्रत और किस पूजा से प्रसन्न होंगे महादेव
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प्रदोष व्रत का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने वाले साधक पर सदैव भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और उसका दु:ख दारिद्रय दूर होता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है, जो साधक के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करते हुए उसका कल्याण करती हैं।
प्रदोष व्रत का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने वाले साधक पर सदैव भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और उसका दु:ख दारिद्रय दूर होता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है, जो साधक के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करते हुए उसका कल्याण करती हैं।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत करने के लिए जल्दी सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें और भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जपें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए प्रदोषकाल में भगवान शिव को शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं।
प्रदोष व्रत में इन बातों का रखें ख्याल
— प्रदोष व्रत के दिन अपना मन, वाणी निर्मल बनाए रखें। व्रत के दौरान क्रोध न करें।
— व्रत में शुचिता और पवित्रता का पूरा ध्यान रखें। अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखें।
— किसी भी प्रकार का नशा न करें।
— व्रत वाले दिन चोरी, झूठ, हिंसा आदि से बचें।