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Karwa Chauth 2020: करवाचौथ के दिन चंद्रमा की पूजा क्यों? पूजा में किन बातों का रखें ध्यान

Mon, 02 Nov 2020 07:01 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 02 Nov 2020 07:01 AM IST
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karwa chauth 2020 date time and why workship moon on this day
करवा चौथ 2020

हिन्दू धर्म में स्त्रियों के ऐसे अनेक व्रत और त्यौहार होते हैं, जिनमें दिनभर उपवास के बाद रात्रि में जब चंद्रमा उदय हो जाता है, तब चंद्रदेव को अर्घ्य देकर और पूजा करके ही अन्न-जल ग्रहण किया जाता है। करवाचौथ का व्रत सुहागिन स्त्रियां अपने अखंड सुहाग और पति के स्वास्थ्य व दीर्घायु होने की मंगल कामना हेतु करती हैं।



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Karwa Chauth

चंद्रमा की पूजा क्यों
शास्त्रों में उल्लेख है कि सौभाग्य, पुत्र, धन-धान्य, पति की रक्षा एवं संकट टालने के लिए चंद्रमा की पूजा की जाती है। करवाचौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का एक अन्य कारण यह भी है कि चंद्रमा औषधियों और मन के अधिपति देवता हैं। उसकी अमृत वर्षा करने वाली किरणें वनस्पतियों और मनुष्य के मन पर सर्वाधिक प्रभाव डालती हैं। दिन भर उपवास के बाद चतुर्थी के चंद्रमा को छलनी की ओट में से जब नारियां देखती हैं तो उनके मन पर पति के प्रति अनन्य अनुराग का भाव उत्पन्न होता है।

उनके मुख व शरीर पर एक विशेष कांति आ जाती है। इससे महिलाओं का यौवन अक्षय, स्वास्थ्य उत्तम और दांपत्य जीवन सुखद हो जाता है। उपनिषद के अनुसार जो व्यक्ति चंद्रमा में पुरुषरूपी ब्रह्म को जानकार उसकी उपासना करता है। वह उज्जवल जीवन व्यतीत करता है। उसके सारे कष्ट दूर होकर सभी पाप नष्ट हो जाते हैं एवं वह लंबी आयु पाता है। चंद्रदेव की कृपा से उपासकों की इस लोक और परलोक में रक्षा होती है।

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करवा चौथ

होता हैं मन का नियंत्रण
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है,जो मन की चंचलता को नियंत्रित करता है। हमारे शरीर में दोनों भौहों के मध्य मस्तक पर चंद्रमा का स्थान माना गया है। यहाँ पर महिलाऐं बिंदी या रोली का टीका लगती हैं,जो चंद्रमा को प्रसन्न कर मन का नियंत्रण करती हैं। भगवान शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र की उपस्थिति उनके योगी स्वरुप को प्रकट करती है। अर्धचंद्र को आशा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।

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करवा चौथ 2020 - फोटो : Amar Ujala
 पूजा में इन बातों का रखें ध्यान-

- पूजा की थाली में रोली, चावल, दीपक, फल, फूल, पताशा, सुहाग का सामान और जल से भरा कलश रखा जाता है। करवा के ऊपर मिटटी की सराही में जौ रखे जाते हैं। जौ समृद्धि, शांति, उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होते हैं। ध्यान रहे कि पूजा की थाली में खंडित चावल व माचिस न रखें।    
             
- चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करें। भूलकर भी अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर न पड़ें,ऐसा होना शुभ नहीं माना जाता है।  

- मिटटी का करवा गणेशजी का प्रतीक माना गया है,इससे चंद्रमा को अर्घ्य दें और दूसरे लोटे के पानी से व्रत खोलें।करवा साबुत और स्वच्छ होना चाहिए,टूटा या दरार वाला करवा पूजा में अशुभ माना गया है।  
- जिस सुहाग चुन्नी को पहनकर आपने कथा सुनी, उसी  चुन्नी को ओढ़कर चंद्रमा को अर्घ्य दें।

-  इस दिन किसी की बुराई-चुगली न करें एवं लहसुन-प्याज वाला और तामसिक खाना न बनाएं।
 
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