Kajari Teej 2022 Date: इस बार कजरी तीज का व्रत 14 अगस्त को है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर हर वर्ष कजरी तीज का त्योहार मनाया जाता है। तीज का त्योहार विशेषकर सावन और भाद्रपद माह में ज्यादा मनाया जाता है। कजरी तीज को कजली, बूढ़ी और सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह अलग-अलग जगहों पर मनाया जाता है। कजरी तीज का व्रत प्रमुख रूप से उत्तर भारत के राज्यों में मनाया जाता है। इसमें विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु और अखंड सौभाग्यवती की कामना के लिए दिनभर व्रत रखते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना करती हैं। तीज का त्योहार वैवाहिक जीवन का पालन करने वाले पति-पत्नी के लिए प्रेम और समर्पण का प्रतीक होता है। सुहागिन महिलाएं पति और अपने परिवार के सभी सदस्यों के जीवन की सुख और समृद्धि के लिए विधि-विधान के साथ निर्जला व्रत रहते हुए पूजा करती हैं। आइए जानते हैं कजरी तीज की तिथि,महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से...
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Kajari Teej 2022 Date: कब है कजरी तीज, जानें सुहाग की लंबी उम्र की कामना वाले इस व्रत की पूरी जानकारी
Fri, 12 Aug 2022 09:54 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 12 Aug 2022 09:54 AM IST
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तीज
- फोटो : अमर उजाला
कजरी तीज शुभ मुहूर्त और तिथि
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार इस बार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 13 अगस्त को रात 12 बजकर 53 मिनट से प्रारंभ हो जाएगी। तृतीया तिथि का समापन 14 अगस्त को रात के 10 बजकर 35 मिनट पर होगा फिर इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। उदया तिथि के आधार पर 14 अगस्त, रविवार को कजरी तीज मनाई जाएगी।
कजरी तीज शुभ योग 2022
इस बार कजरी तीज पर कई शुभ योग बन रहे हैं। कजरी तीज के दिन सु्कर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ योग बन रहे हैं। कजरी तीज पर पूजा का शुभ मुहूर्त 14 अगस्त को सुबह 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
इस बार कजरी तीज पर कई शुभ योग बन रहे हैं। कजरी तीज के दिन सु्कर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ योग बन रहे हैं। कजरी तीज पर पूजा का शुभ मुहूर्त 14 अगस्त को सुबह 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
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- फोटो : अमर उजाला
कजरी तीज व्रत की मान्यताएं
- कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं।
- सुहागिन महिलाओं के अलावा कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं और विधि-विधान के साथ पूजा करती हैं।
- कजरी तीज पर सत्तू में घी और मेवा डालकर कई तरह के पकवान बनाएं जाते है।
- चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा के दर्शन करके व्रत तोड़ा जाता है।
- कजरी तीज पर गायों की विशेष रूप से पूजा की जाती है।
- इस दिन महिलाएं एक जगह एकत्रित होकर झूले और कजरी गीत गाती हैं।
- कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं।
- सुहागिन महिलाओं के अलावा कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं और विधि-विधान के साथ पूजा करती हैं।
- कजरी तीज पर सत्तू में घी और मेवा डालकर कई तरह के पकवान बनाएं जाते है।
- चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा के दर्शन करके व्रत तोड़ा जाता है।
- कजरी तीज पर गायों की विशेष रूप से पूजा की जाती है।
- इस दिन महिलाएं एक जगह एकत्रित होकर झूले और कजरी गीत गाती हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
कजरी तीज पूजा विधि
अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाने वाला कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखने का संकल्प लेती हैं। फिर इसके बाद स्नान और नए वस्त्र पहनकर शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियां बनाएं। इसके बाद मूर्ति को लाल या पीले रंग के कपड़े के साथ चौकी पर स्थापित करें। फिर भगवान शिव का गंगाजल, गाय के दूध,शहद आदि से अभिषेक करें। इसके बाद माता पार्वती को सुहाग का सारा सामान अर्पित करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती धूप और दीप जलाएं। इसके बाद कजरी तीज व्रत कथा सुने। फिर अंत में मात पार्वती और भगवान शिव की आरती करते हुए अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगे।
अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाने वाला कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखने का संकल्प लेती हैं। फिर इसके बाद स्नान और नए वस्त्र पहनकर शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियां बनाएं। इसके बाद मूर्ति को लाल या पीले रंग के कपड़े के साथ चौकी पर स्थापित करें। फिर भगवान शिव का गंगाजल, गाय के दूध,शहद आदि से अभिषेक करें। इसके बाद माता पार्वती को सुहाग का सारा सामान अर्पित करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती धूप और दीप जलाएं। इसके बाद कजरी तीज व्रत कथा सुने। फिर अंत में मात पार्वती और भगवान शिव की आरती करते हुए अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगे।