जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत की तारीख तय करते समय केवल अष्टमी तिथि देखना पर्याप्त नहीं माना जाता। इस व्रत में आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी के साथ प्रदोष काल का विशेष महत्व है। यही कारण है कि जब अष्टमी दो तिथियों के बीच पड़ती दिखाई देती है, तब व्रत के दिन को लेकर लोगों के मन में भ्रम पैदा हो जाता है। वर्ष 2026 में भी ऐसी स्थिति बन रही है। इस साल आश्विन कृष्ण अष्टमी 3 अक्तूबर की सुबह करीब 7:59 बजे शुरू होकर 4 अक्तूबर की सुबह लगभग 5:51 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 3 अक्तूबर की शाम प्रदोष काल में अष्टमी तिथि रहेगी, इसलिए इसी दिन जितिया व्रत रखा जाएगा।
जितिया व्रत 2026: इस पर्व में अष्टमी और प्रदोष काल का क्या है महत्व? क्यों इसी समय की जाती है पूजा
जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाएगा। इस दिन माताएं अपनी संतान के मंगल भविष्य की कामना करते हुए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती है और शाम को प्रदोष काल में पूजा करती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस व्रत में प्रदोष काल का क्या महत्व है।
क्या सुबह पूजा करना जरूरी नहीं है?
जितिया के दिन सुबह स्नान करने, व्रत का संकल्प लेने और नियमित पूजा-पाठ करने की परंपरा है। इसे गलत नहीं माना जाता। हालांकि व्रत की मुख्य पूजा शाम के समय करने का विधान प्रचलित है। इसलिए सुबह की दैनिक पूजा और प्रदोष काल में होने वाले जितिया पूजन को अलग-अलग समझना चाहिए।
जीमूतवाहन से क्यों जुड़ा है जितिया व्रत?
जितिया की धार्मिक परंपरा जीमूतवाहन से जुड़ी कथा पर आधारित है। कथा के अनुसार, शंखचूड़ नामक नागपुत्र को गरुड़ से बचाने के लिए जीमूतवाहन ने स्वयं को उनके सामने प्रस्तुत कर दिया और संतान की रक्षा के लिए अपना जीवन तक त्यागने को तैयार हो गए। उनके इस त्याग और मातृत्व की भावना से जितिया व्रत की मान्यता जुड़ी हुई है।
3 अक्तूबर को ही क्यों रखा जाएगा व्रत?
2026 में अष्टमी 3 अक्तूबर की सुबह से शुरू होगी और अगले दिन सुबह समाप्त हो जाएगी। चूंकि 3 अक्तूबर की शाम प्रदोष काल में अष्टमी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन व्रत और मुख्य जीमूतवाहन पूजा की जाएगी। 4 अक्तूबर की शाम तक अष्टमी नहीं रहेगी।
पूजा के बाद उसी रात होगा पारण?
जितिया में संध्या पूजा और पारण दो अलग प्रक्रियाएं हैं। शाम को पूजा, कथा और आरती पूरी करने के बाद उसी रात व्रत नहीं खोला जाता। अगले दिन अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद पारण किया जाता है। इस वर्ष पारण 4 अक्तूबर की सुबह होगा। इसके लिए अपने क्षेत्र के पंचांग में दिए गए समय और परिवार की परंपरा को ध्यान में रखना उचित रहेगा। इस तरह जितिया व्रत में तीन बातों को अलग-अलग समझना जरूरी है, व्रत का दिन, शाम का मुख्य पूजन और अगले दिन होने वाला पारण। इन्हें एक ही समय मानने से ही अक्सर तारीख और मुहूर्त को लेकर भ्रम पैदा होता है।
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