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January Skanda Shashti 2025: आज स्कंद षष्ठी पर जरूर करें इस कथा का पाठ, मिलेगा भगवान कार्तिकेय का आशीर्वाद

Sun, 05 Jan 2025 07:31 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Sun, 05 Jan 2025 07:31 AM IST
सार

हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इस दिन स्कंद षष्ठी व्रत कथा का पाठ करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

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January Skanda Shashti 2025 Skanda Shashti vrat katha in hindi
स्कंद षष्ठी व्रत कथा - फोटो : Amar Ujala
Skanda Shashti 2025 Date: हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव के बड़े पुत्र यानी भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति माना जाता है। विशेष रूप से भगवान कार्तिकेय की पूजा दक्षिण भारत में की जाती है। इस दिन स्कंद षष्ठी व्रत कथा का पाठ करना बहुत ही शुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने दानव तारकासुर का वध कर तीनों लोकों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। स्कंद षष्ठी का व्रत कथा कुछ उस प्रकार है। 


स्कंद षष्ठी: भगवान कार्तिकेय और तारकासुर वध की कथा
स्कंद पुराण के अनुसार, शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ था। उन्होंने तारकासुर नामक असुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्त किया। इस उपलक्ष्य में स्कंद षष्ठी का पर्व मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की और वरदान प्राप्त किया कि उसे केवल शिव के पुत्र के द्वारा ही पराजित किया जा सकता है। शिव जी ने यह वरदान दे दिया, लेकिन कुछ समय बाद माता सती ने आत्मदाह कर लिया, जिससे शिव का कोई पुत्र न हो सका।
 
January Skanda Shashti 2025 Skanda Shashti vrat katha in hindi
स्कंद षष्ठी व्रत कथा - फोटो : freepik
माता सती के जाने के बाद शिव जी ने संसार से दूरी बना ली और गहरे तप में लीन हो गए। इस बीच तारकासुर ने तीनों लोकों पर अत्याचार बढ़ा दिए। देवता मदद के लिए ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। ब्रह्मा जी ने कहा कि तारकासुर का अंत केवल शिव-पुत्र के हाथों ही संभव है। देवताओं ने शिव को वैराग्य से बाहर लाने के लिए कामदेव को भेजा। 
 

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January Skanda Shashti 2025 Skanda Shashti vrat katha in hindi
स्कंद षष्ठी व्रत कथा - फोटो : freepik
कामदेव ने शिव पर प्रेम के बाण चलाए, जिससे शिव की तपस्या भंग हो गई। शिव इस छल पर अत्यंत क्रोधित हुए और अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में कामदेव की पत्नी रति ने शिव से कामदेव को पुनर्जीवित करने की प्रार्थना की। शिव ने रति के अनुरोध को स्वीकार कर कामदेव को बिना शरीर के पुनर्जीवित कर दिया।

 
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स्कंद षष्ठी व्रत कथा - फोटो : adobe stock
इसके बाद शिव जी माता पार्वती से विवाह करने के लिए तैयार हुए। शिव दी ने अपनी तीसरी आंख से छह दिव्य चिंगारियां उत्पन्न कीं, जिन्हें अग्निदेव ने सरवन नदी में प्रवाहित कर दिया। इन चिंगारियों से छह बालकों का जन्म हुआ। माता पार्वती ने इन बालकों को अपनी ममता से एक कर दिया और इसी से भगवान कार्तिकेय प्रकट हुए। भगवान कार्तिकेय छह मुख और बारह भुजाओं वाले दिव्य योद्धा के रूप में विकसित हुए। उन्होंने युद्ध-कौशल में महारत हासिल की और तारकासुर के विरुद्ध युद्ध छेड़ा। इस भीषण युद्ध में उन्होंने तारकासुर का वध किया।

 
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January Skanda Shashti 2025 Skanda Shashti vrat katha in hindi
स्कंद षष्ठी व्रत कथा - फोटो : adobe stock
तारकासुर के शरीर से एक मोर उत्पन्न हुआ, जिसे भगवान कार्तिकेय ने अपना वाहन बना लिया। देवताओं ने कार्तिकेय को उनकी वीरता और पराक्रम के लिए देवसेना का सेनापति घोषित किया। शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को तारकासुर पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में स्कंद षष्ठी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान कार्तिकेय के पराक्रम और विजय का प्रतीक है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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