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Jagannath Rath Yatra 2025: जगन्नाथ मंदिर में ध्वजा बदलना क्यों है अनिवार्य? एक दिन की भूल से हो सकता है अनिष्ट

Fri, 27 Jun 2025 10:18 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 27 Jun 2025 10:18 AM IST
सार

Jagannath Temple Mandir Flag: पुरी की जगन्नाथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र और प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और दशमी तिथि तक चलती है। 
 

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Jagannath Temple Daily Flag Ritual Why Even One Missed Day Is Considered Ominous
जगन्नाथ मंदिर में रोज क्यों बदली जाती है ध्वजा - फोटो : Adobe Stock

Jagnnath Mandir mein Roz Kyon Badali Jaati hai Dhwaja: पुरी की जगन्नाथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र और प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और दशमी तिथि तक चलती है। इस वर्ष यह यात्रा 27 जून से शुरू होकर 5 जुलाई तक संपन्न होगी।


Jagannath Rath Yatra 2025: इन 4 राशियों के जीवन में बरसती है भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा, सुख-समृद्धि से भरपूर होता है जीवन
श्रद्धालुओं का यह विश्वास है कि इस यात्रा में भाग लेना और भगवान जगन्नाथ के दर्शन करना जीवन के कष्टों को दूर करता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस यात्रा में सच्चे मन से शामिल होता है, उसे न केवल शांति और सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि मृत्यु के बाद मोक्ष भी मिलता है। जगन्नाथ मंदिर से कई रोचक कथाएं और परम्पराएं जुड़ी हुई हैं। इसी परम्परा में मंदिर के शीर्ष पर लगी हुई ध्वजा को बदलना भी शामिल है। जगन्नाथ मंदिर की ध्वजा केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि श्रद्धा, रहस्य और भक्ति से जुड़ी हुई एक महान परंपरा है। आइये जानते हैं इसके बारे में विस्तार से। 
जगन्नाथ पुरी के मंदिर की चमत्कारी रसोई में कभी कम नहीं पड़ता प्रसाद और भगवान की मूर्तियां क्यों हैं अधूरी

Jagannath Temple Daily Flag Ritual Why Even One Missed Day Is Considered Ominous
जगन्नाथ मंदिर में रोज क्यों बदली जाती है ध्वजा - फोटो : adobe stock

प्रतिदिन क्यों बदली जाती है ध्वजा?
पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर पर हर दिन शाम को ध्वजा बदली जाती है। यह कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक धार्मिक अनिवार्यता मानी जाती है। पौराणिक मान्यता है कि यदि किसी दिन ध्वजा नहीं बदली गई, तो मंदिर 18 वर्षों तक स्वतः बंद हो जाएगा। इस मान्यता के पीछे यह विश्वास छिपा है कि भगवान जगन्नाथ की उपस्थिति और उनकी कृपा ध्वजा के माध्यम से आकाश की ओर फैलती है। यदि यह ध्वजा पुरानी, फटी या अनुपस्थित हो जाए, तो वह दिव्य ऊर्जा बाधित हो जाती है। इसलिए, हर दिन सूर्यास्त से पूर्व इसे बदला जाना आवश्यक है।

Jagannath Temple Daily Flag Ritual Why Even One Missed Day Is Considered Ominous
जगन्नाथ मंदिर में रोज क्यों बदली जाती है ध्वजा - फोटो : adobe stock

ध्वजा की दिशा और प्राकृतिक रहस्य
श्री जगन्नाथ मंदिर की ध्वजा अपने आप में एक अनोखा रहस्य समेटे हुए है यह सदैव हवा की दिशा के विपरीत लहराती है। सामान्यतः समुद्र तटीय क्षेत्रों में हवा समुद्र से भूमि की ओर बहती है, लेकिन पुरी में यह नियम उलट जाता है। यहाँ हवा भूमि से समुद्र की ओर बहती है। अचरज की बात यह है कि मंदिर की ध्वजा इन प्राकृतिक हवाओं की विपरीत दिशा में फहराती है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अब तक समझ नहीं आया है। यह रहस्य आज तक विज्ञान के लिए चुनौती है, लेकिन भक्तों के लिए यह भगवान जगन्नाथ की अलौकिक शक्ति का प्रमाण है।

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Jagannath Temple Daily Flag Ritual Why Even One Missed Day Is Considered Ominous
जगन्नाथ मंदिर में रोज क्यों बदली जाती है ध्वजा - फोटो : adobe stock

सेवा की 800 वर्षों पुरानी परंपरा
ध्वजा को बदलने का कार्य किसी साधारण व्यक्ति का नहीं, बल्कि पुरी के चोला परिवार का विशेष उत्तरदायित्व है। यह परिवार पिछले 800 वर्षों से यह सेवा लगातार निभा रहा है। इस सेवा को कोई आम धार्मिक कर्तव्य नहीं माना जाता, बल्कि यह भगवान के प्रति समर्पण, साहस और निष्कलंक परंपरा का प्रतीक है। मंदिर की शिखर तक चढ़कर, बिना किसी सुरक्षा उपकरण या मशीन के, प्रतिदिन सैकड़ों फीट ऊंचाई पर ध्वजा को चढ़ाना अत्यंत कठिन कार्य है। इस जोखिम भरे सेवा को यह परिवार श्रद्धा से निभाता है, जिससे यह परंपरा आज भी जीवित है।

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जगन्नाथ मंदिर में रोज क्यों बदली जाती है ध्वजा - फोटो : adobe stock

भगवान का स्वप्न और परंपरा की उत्पत्ति
ध्वजा को प्रतिदिन बदलने की परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि एक समय भगवान जगन्नाथ ने मंदिर के सेवकों को स्वप्न में दर्शन दिए और संकेत दिया कि मंदिर पर लगी उनकी ध्वजा पुरानी और फटी हुई है। जब अगली सुबह सेवकों ने ध्यान दिया, तो वास्तव में ध्वजा जीर्ण अवस्था में थी। यह घटना भगवान की ओर से चेतावनी मानी गई और तभी से यह निर्णय लिया गया कि अब से प्रतिदिन नई ध्वजा अर्पित की जाएगी। इस तरह यह परंपरा आरंभ हुई, जो आज भी अक्षुण्ण बनी हुई है।

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