Holika Dahan 2023: हिंदू धर्म में होली पर्व को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शाम से होली पर्व की शुरुआत हो जाती है। सबसे पहले शाम के समय होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन सुबह के समय रंग वाली होली धुमधाम से खेली जाती है। लेकिन इस वर्ष पूर्णिमा के दिन भद्राकाल के कारण होलिका दहन की तिथि को लेकर उलझन है।
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Holika Dahan Date 2023: इस बार कब है होलिका दहन 6 या 7 मार्च ? जानिए सही तिथि और महत्व
Mon, 06 Mar 2023 07:34 AM IST
विनोद शुक्ला
मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य
मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 06 Mar 2023 07:34 AM IST
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holika dahan 2023: होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 07 मार्च, मंगलवार को शाम 06 बजकर 12 मिनट से रात 08 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।
- फोटो : अमर उजाला
क्या होलिका दहन पर होगा भद्रा का साया?
- फोटो : अमर उजाला
प्रदोष काल में 7 मार्च को होलिका दहन
ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार 7 मार्च को होलिका दहन किया जायेगा। होलिका दहन प्रदोष काल में करना उत्तम होता है। यदि भद्रा पूँछ प्रदोष से पहले और मध्य रात्रि के पश्चात व्याप्त हो तो उसे होलिका दहन के लिये नहीं लिया जा सकता क्योंकि होलिका दहन का मुहूर्त सूर्यास्त और मध्य रात्रि के बीच ही निर्धारित किया जाता है। फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 06 मार्च दिन सोमवार को शाम 04.17 बजे प्रारंभ होगी और इस तिथि का समापन 7 मार्च दिन मंगलवार को शाम 06.09 बजे होगा। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल में होलिका दहन होती है। ऐसे में इस साल होलिका दहन 7 मार्च दिन मंगलवार को होगा। होलिका दहन के दिन 7 मार्च को भद्रा सुबह 5.15 बजे तक है। ऐसे में प्रदोष काल में होलिका दहन के समय भद्रा का साया नहीं रहेगा।
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ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार 7 मार्च को होलिका दहन किया जायेगा। होलिका दहन प्रदोष काल में करना उत्तम होता है। यदि भद्रा पूँछ प्रदोष से पहले और मध्य रात्रि के पश्चात व्याप्त हो तो उसे होलिका दहन के लिये नहीं लिया जा सकता क्योंकि होलिका दहन का मुहूर्त सूर्यास्त और मध्य रात्रि के बीच ही निर्धारित किया जाता है। फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 06 मार्च दिन सोमवार को शाम 04.17 बजे प्रारंभ होगी और इस तिथि का समापन 7 मार्च दिन मंगलवार को शाम 06.09 बजे होगा। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल में होलिका दहन होती है। ऐसे में इस साल होलिका दहन 7 मार्च दिन मंगलवार को होगा। होलिका दहन के दिन 7 मार्च को भद्रा सुबह 5.15 बजे तक है। ऐसे में प्रदोष काल में होलिका दहन के समय भद्रा का साया नहीं रहेगा।
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- फोटो : ani
होलिका दहन की तैयारियां
होलिका दहन के लिए लगभग एक महीने पहले माघ पूर्णिमा से ही तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। कांटेदार झाड़ियों या लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है फिर होली वाले दिन शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन में गाय के गोबर से बने कंडे और कुछ चुने हुए पेड़ों की लकड़ियों को ही जलाना चाहिए। क्योंकि धार्मिक दृष्टि से भी पेड़ों पर किसी न किसी देवता का अधिपत्य होता है। उनमें देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए तीज-त्योहारों पर शास्त्रों में पेड़ों की पूजा करने का भी विधान है, जो हमारे लिए स्वास्थ्य वर्धक व हमारे प्राणों के रक्षक हैं। इसलिए हरे पेड़ों का होलिका दहन नहीं करना चाहिए।
Holika Dahan 2023: क्या होलिका दहन पर होगा भद्रा का साया? जानें होलिका दहन का सही मुहूर्त
होलिका दहन के लिए लगभग एक महीने पहले माघ पूर्णिमा से ही तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। कांटेदार झाड़ियों या लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है फिर होली वाले दिन शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन में गाय के गोबर से बने कंडे और कुछ चुने हुए पेड़ों की लकड़ियों को ही जलाना चाहिए। क्योंकि धार्मिक दृष्टि से भी पेड़ों पर किसी न किसी देवता का अधिपत्य होता है। उनमें देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए तीज-त्योहारों पर शास्त्रों में पेड़ों की पूजा करने का भी विधान है, जो हमारे लिए स्वास्थ्य वर्धक व हमारे प्राणों के रक्षक हैं। इसलिए हरे पेड़ों का होलिका दहन नहीं करना चाहिए।
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होलिका दहन
- फोटो : अमर उजाला
होलिका दहन का महत्व
हिंदू धर्म की मानें तो हर त्योहार का अपना धार्मिक और पौराणिक महत्व होता है। क्योंकि हर एक त्योहार हमें एक अच्छा संदेश, सीख और शिक्षा प्रदान करता है। इसी क्रम में होलिका दहन पर्व भी हमें एक अच्छी सीख देता है। होलिका दहन के द्वारा हम समाज के अंदर फैली बुराइयों को जलाते हुए उससे सीख लेते हैं। माना जाता है कि इस दिन हर एक व्यक्ति को संकल्प लेते हुए अपनी असुरी प्रवृत्ति का होलिका की अग्नि में दहन कर देना चाहिए। मान्यता अनुसार जो भी कोई व्यक्ति पूरे विधि विधान से होलिका दहन की पूजा कर उसकी परिक्रमा करता है उसे स्वस्थ जीवन और सुख-समृद्ध की प्राप्ति होती है। वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करते हुए इस उत्सव के माध्यम से हम अग्नि देवता के प्रति अपना कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
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Holika Dahan
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इस होलिका दहन शनि दोष से मिलेगी मुक्ति
वैदिक शास्त्रों अनुसार होलिका की रात्रि के समय पूजा करने से जिस भी जातक की कुंडली में व्याप्त दोष होते हैं उन्हें कम किया जा सकता है। इसके साथ ही होलिका की पूजा कर व्यक्ति शनि दोष और पितृ दोष को भी दूर कर सकता है।होलिका दहन पर गन्ना भूनने और अग्नि की परिक्रमा करने से दोष दूर होते हैं। होलिका की परिक्रमा से जातक की ग्रह बाधा भी दूर होती है।
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