Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित पर्व है, जिसे भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, तरक्की, लाभ और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। साथ ही सुख-समृद्धि की कामना करते हुए विधि-विधान से शिव-पार्वती की आराधना करती हैं।
Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज पर पूजा के तीन शुभ मुहूर्त, जानें महत्व और पूजन विधि
Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज महादेव और पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। यदि इस तिथि पर महादेव को केवल जल, फल, फूल और बेलपत्र चढ़ाया जाए, तो वह आसानी से प्रसन्न होते हैं
हरतालिका तीज 2025 शुभ योग और मुहूर्त
ज्योतिषियों के अनुसार इस साल तृतीया तिथि की शुरुआत 25 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से होगी। तिथि का समापन 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर है। ऐसे में 26 अगस्त 2025 को हरतालिका तीज मनाई जाएगी। इस दिन साध्य योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 09 मिनट तक है। फिर शुभ योग प्रारंभ होगा। हालांकि रवि योग का संयोग पूरे दिन रहने वाला है।
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बात अगर पूजा के मुहूर्त की करें, तो हरतालिका तीज पर पहला मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त) सुबह 4 बजकर 27 मिनट से सुबह के 5:12 मिनट तक रहेगा। फिर दूसरा (अभिजीत मुहूर्त) सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक मान्य है। हालांकि तीसरा (विजय मुहूर्त) दोपहर में 2 बजकर 31 मिनट से दोपहर 3 बजकर 23 मिनट तक रहने वाला है। आप इस अवधि में शिव परिवार की उपासना कर सकती हैं।
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पूजा विधि
- हरतालिका तीज पर पूजा के लिए सर्वप्रथम चौकी पर लाल रंग का साफ वस्त्र बिछाएं।
- अब मिट्टी से भगवान शिव, देवी पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाएं।
- फिर प्रतिमा का चौकी पर रखें और उन्हें वस्त्र पहनाएं।
- भगवान शिव, पार्वती माता और गणेश जी को तिलक लगाएं।
- इस दौरान भगवान शिव को शमी का फूल अर्पित करें और माता पार्वती को सोलह श्रृंगार।
- फिर धूप, चंदन, फल, मिटाई, पान, सुपारी, नारियल और बेलपत्र भी चढ़ाएं।
- इसके बाद एक साफ कलश में जल और आम के पत्ते रखकर उसपर नारियल रखें।
- गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं और दूर्वा भी अर्पित करें, इससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- अब हरतालिका तीज व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।
- इसके बाद भगवान शिव माता पार्वती सहित गणेश जी की आरती करें।
- अंत में सभी में प्रसाद बांटकर सुख-समृद्धि की कामना करें।
भगवान शिव की आरती
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
ऊँ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ऊँ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ऊँ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥
ऊँ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ऊँ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ऊँ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ऊँ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥
ऊँ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ऊँ जय शिव...॥
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥
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