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Hanuman Jayanti 2021: हनुमानजी की आराधना से मिलती हैं अष्ट सिद्धि और नव निधि, जानिए क्या हैं ये नौ निधियां

Mon, 26 Apr 2021 07:24 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 26 Apr 2021 07:24 AM IST
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hanuman jayanti 2021 meaning of asta siddhi nau nidhi
हनुमान जयंती 2021 : भगवान शंकर के ग्यारहवें रूद्र ने वानरराज केसरी और माता अंजना के घर पुत्र रूप में जन्म लिया - फोटो : अमर उजाला

भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार माने जाने वाले श्री रामभक्त हनुमानजी का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। हनुमान जंयती के दिन हनुमान जी के दर्शन मात्र से ही जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि माता सीता ने हनुमानजी को आठ सिद्धियां और नौ निधियां का आशीर्वाद दिया था। इसलिए हनुमान चालीसा में एक पंक्ति आती है,‘अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, असवर दीन जानकी माता’। आइए जानते हैं कि ये नौ निधियां कौन सी होती हैं और इनको प्राप्त करने के बाद कौन से चमत्कार होते हैं।

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hanuman ji - फोटो : instagram

1 .पहली निधि जो हनुमानजी के पास है वह है पद्म निधि। इसके लक्षणों से संपन्न मनुष्य सात्विक गुणयुक्त वाला होता है एवं उसकी कमाई गई संपदा भी सात्विक होती है। सात्विक तरीके से कमाई गई संपदा पीढ़ियों तक चलती रहती है। सात्विक गुणों से संपन्न व्यक्ति सोना, चांदी आदि का संग्रह करके दान करता है।

2 .महापद्म निधि- यह निधि भी पद्म निधि की तरह ही सात्विक होती है। लेकिन इसका प्रभाव पीढ़ी दर पीढ़ी नहीं रहता। इस निधि से लक्षित व्यक्ति अपने संग्रहित धन आदि का दान धार्मिक स्थानों में करता है।

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हैप्पी हनुमान जयंती - फोटो : अमर उजाला
3 .नील निधि- इस निधि में सत्व और रज गुण दोनों ही मिश्रित होते हैं। ऐसी निधि व्यापार द्वारा ही प्राप्त होती है। इसलिए इस निधि से संपन्न प्राणी में दोनों ही गुणों की प्रधानता होती है। नील निधि से सुशोभित मनुष्य सात्विक तेज से संयुक्त होता है। उसकी संपत्ति तीन पीढ़ी तक रहती है।

4 .मुकुंद निधि- इस निधि में पूर्णत: रजोगुण की प्रधानता रहती है। इसलिए इसे राजसी स्वाभाव वाली निधि कहा गया है।इस निधि से संपन्न व्यक्ति या साधक का मन भोगादि में लगा रहता है यह निधि एक पीढ़ी बाद खत्म हो जाती है।
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hanumanji
5 .नंद निधि- इस निधि में रज और तम गुणों का मिश्रण होता है। माना जाता है कि यह निधि साधक को लंबी आयु व निरंतर तरक्की प्रदान करती है। इस निधि से संपन्न व्यक्ति अपनी तारीफ से बहुत खुश होता है। यह निधि साधको को लंबी आयु व निरंतर तरक्की प्रदान करती है।

6 .मकर निधि- इस निधि को तामसी निधि माना गया है। इस निधि से संपन्न व्यक्ति को अस्त्र- शस्त्र आदि को  संग्रह करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति का राजा और शासन में हस्तक्षेप होता है। वह युद्ध में  शत्रुओं पर भारी पड़ता है।
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7.कच्छप निधि- इस निधि से युक्त व्यक्ति अपनी संपत्ति को छुपाकर रखता है,वह अपनी संपत्ति का उपभोग स्वयं करता है।

8 .शंख निधि- शंख निधि व्यक्ति के पास सिर्फ एक पीढ़ी तक होती है।  

9 .खर्व निधि- इसे मिश्रित निधि भी कहते हैं नाम के अनुरूप ही यह निधि अन्य आठ निधियों का सम्मिश्रण होती है। इस निधि से संपन्न व्यक्ति को मिश्रित स्वभाव का कहा गया है।
 
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