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govatsa dwadashi 2019: ग्रह दोषों से मुक्ति पाने का दिन है गोवत्स द्वादशी का

Thu, 24 Oct 2019 10:43 AM IST
vinod shukla विनोद शुक्ला
Updated Thu, 24 Oct 2019 10:43 AM IST
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govatsa dwadashi 2019 vrat katha importance and puja vidhi

गोवत्स द्वादशी कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला वह पर्व है। इस साल यह 25 अक्टूबर, गुरुवार के दिन हैं। इस दिन सत्वगुणी, अपने सानिध्य से दूसरों का पालन करने वाली, सम्पूर्ण सृष्टि को पोषण प्रदान करने वाली गाय माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु गाय-बछड़ों का  पूजन किया जाता है। गौ की रक्षा एवं पूजन करने वालों पर सदैव श्री विष्णु की कृपा बनी रहती है।

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गोवत्स द्वादशी का महात्म्य
भविष्य पुराण के अनुसार महाभारत युद्ध की समाप्ति पर युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण से कहा-'हे जगत्पते! मेरे राज्य की प्राप्ति के लिए अठारह अक्षौहिणी सेनाएं, भीष्म, द्रोण, कलिंगराज कर्ण एवं दुर्योधन आदि के मरने से मेरे ह्रदय में  महान क्लेश हुआ है। अतः इन पापों से छुटकारा पाने के लिए कोई मार्ग बताएं।' इस पर श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को गायों का महत्व  समझाते हुए गोवत्स द्वादशी नाम के उत्तम व्रत का पालन करने को कहा।

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गोवत्स द्वादशी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राजा उत्तानपाद और उनकी पत्नी सुनीति ने इस व्रत को किया। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें बालक ध्रुव की प्राप्ति हुई। दस नक्षत्रों से युक्त ध्रुव आज भी आकाश में दिखाई देते है। शास्त्रानुसार ध्रुव तारे को देखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। संतान सुख की कामना रखने वालों को गोवत्स द्वादशी का व्रत अवश्य रखना चाहिए।

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प्रणाम कर गौ माता का लें आशीर्वाद
गाय, भगवान श्री कृष्ण को अतिप्रिय है, गौ पृथ्वी का प्रतीक हैं, गौ माता में सभी देवी-देवता विद्यमान रहते हैं, सभी वेद भी गौओं में प्रतिष्ठित हैं। गाय से प्राप्त सभी घटकों में जैसे दूध, घी, गोबर अथवा गौमूत्र में सभी देवताओं के तत्व संग्रहित रहते हैं। इसलिए इस दिन यदि गौ पूजा न कर पाएं तो कम से कम गौ माता का दर्शन करें और उन्हें प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त करें। 

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गाय को कराएं भोजन
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यदि आपकी कुंडली में पितृदोष है तो सफेद रंग की गाय को को रोटी खिलाने से वह दूर हो जाता है।

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