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Govardhan Puja 2020: गोवर्धन पूजा आज, इस विधि से बनाएं अन्नकूट, लगाएं 56 भोग

Sun, 15 Nov 2020 08:17 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Sun, 15 Nov 2020 08:17 AM IST
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Govardhan Puja 2020 know the significance of 56 Bhoga in Govardhan Puja
govardhan puja 2020 - फोटो : अमर उजाला

आज गोवर्धन पूजा है। इस पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहते हैं। हिन्दू आस्था का यह त्योहार हर साल कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है। इस दिन गौ पूजन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। इस दिन 56 भोग लगाने की परंपरा है। आइए जानते हैं यह परंपरा कैसे शुरू हुई और इसका पौराणिक महत्व क्या है। 

Govardhan Puja 2020 know the significance of 56 Bhoga in Govardhan Puja
गोवर्धन पूजा 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

धार्मिक महत्व

कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर संपूर्ण गोकुल वासियों की इंद्र के कोप से रक्षा की थी। इन्द्र के अभिमान को चूर करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करें। गोवर्धन पर्वत से गोकुल वासियों को पशुओं के लिए चारा मिलता है। गोवर्धन पर्वत बादलों को रोककर वर्षा करवाता है जिससे कृषि उन्नत होती है। इसलिए गोवर्धन की पूजा की जानी चाहिए।

Govardhan Puja 2020 know the significance of 56 Bhoga in Govardhan Puja
गोवर्धन पूजा करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
पूजा-विधि और सामग्री
गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट बनाकर गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इसके पीछे एक मान्यता यह भी है कि इन्द्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली तब गोकुल वासियों ने 56 भोग बनाकर श्रीकृष्ण को भोग लगाया था। इससे प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने गोकुल वासियों को आशीर्वाद दिया कि वह गोकुल वासियों की रक्षा करेंगे। इन्द्र से भयभीत होने की कोई जरूरत नहीं है।
 

अन्नकूट बनाने के लिए कई तरह की सब्जियां, दूध और मावे से बने मिष्ठान और चावल का प्रयोग किया जाता है। अन्नकूट में ऋतु संबंधी अन्न, फल, सब्जियां का प्रसाद बनाया जाता है। गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण के साथ धरती पर अन्न उपजाने में मदद करने वाले सभी देवों जैसे, इन्द्र, अग्नि, वृक्ष और जल देवता की भी आराधना की जाती है। गोवर्धन पूजा में इन्द्र की पूजा इसलिए होती है क्योंकि अभिमान चूर होने के बाद इन्द्र ने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी और आशीर्वाद स्वरूप गोवर्धन पूजा में इन्द्र की पूजा को भी मान्यता दे दी।

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Govardhan Puja 2020 know the significance of 56 Bhoga in Govardhan Puja
गोवर्धन पूजा की कथा - फोटो : facebook
ऐसे शुरू हुई 56 भोग की परंपरा

ऐसी मान्यता है इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए और उनका घमंड तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था। इंद्र ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए लगातार 7 दिनों तक ब्रज में मूसलाधार बारिश कराते रहे। तब भगवान कृष्ण को लगातार सात दिनों तक भूखे-प्यासे अपनी उंगली पर गोर्वधन पर्वत को उठाएं रखना पड़ा था। इसके बाद उन्हें सात दिनों और आठ पहर के हिसाब से 56 व्यंजन खिलाए गए थे। माना जाता है तभी से ये 56 भोग की परम्परा की  शुरूआत हुई।

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गोवर्धन पूजा 2020 - फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त (Govardhan Puja Shubh Muhurat 2020)
पूजा मुहूर्त :15:18 से 17:27 तक
अवधि : 2 घंटे 8 मिनट
अगली फोटो गैलरी देखें
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