फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Dusshera 2021: इस पुष्प के बिना अधूरा है दशहरा का पूजन, जानिए महत्व व पूजा विधि

Thu, 14 Oct 2021 12:51 PM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: शशि सिंह Updated Thu, 14 Oct 2021 12:51 PM IST
विज्ञापन
Dusshera 2021 poojan is incomplete without this flower  know its importance and poojan vidhi of vijayadashami
Dusshera 2021 - फोटो : अमर उजाला

15 अक्टूबर को देश भर में दशहरा या विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। आश्विन मास की शुक्ल पक्ष को मनाया जाने वाला दशहरा या विजयादशमी का यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इसी ख़ास दिन भगवान राम ने रावण का वध कर धरती को पाप मुक्त किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीराम ने भी रावण से युद्ध करने से पहले अपराजिता पूजन किया था। जिसकी वजह से ही उन्हें विजय प्राप्त हुई थी। चलिए जानते हैं क्या है अपराजिता पूजन। क्यों इसके बिना अधूरा माना जाता है विजयदशमी का त्योहार।

Dusshera 2021 poojan is incomplete without this flower  know its importance and poojan vidhi of vijayadashami
दशहरा 2021 - फोटो : istock

अपराजिता पूजन क्या है 
शास्त्रों में दशहरा का असली नाम विजयदशमी बताया गया है,  जिसे अपराजिता पूजा भी कहते हैं। अपराजिता देवी सकल सिद्धियों की प्रदात्री साक्षात माता दुर्गा का ही अवतार हैं। भगवान श्री राम ने माता अपराजिता का पूजन करके ही रावण से युद्ध करने के लिए विजयदशमी को प्रस्थान किया था।

Dusshera 2021 poojan is incomplete without this flower  know its importance and poojan vidhi of vijayadashami
दशहरा 2021

अपराजिता हैं आदिकाल की श्रेष्ठ देवी
महार्षि वेद व्यास जी ने माता अपराजिता को आदि काल की श्रेष्ठ फल देने वाली देवताओं द्वारा पूजित देवी बताया है। ऐसी मान्यता है कि अपराजिता पूजा करने से कभी भी असफलता का सामना नहीं करना पड़ता।

विज्ञापन
विज्ञापन
Dusshera 2021 poojan is incomplete without this flower  know its importance and poojan vidhi of vijayadashami
दशहरा 2021 - फोटो : amar ujala

अपराजिता पूजन का महत्व
विजयदशमी के दिन अपराजिता पूजन का विशेष महत्व है, क्योंकि अश्विन शुक्ल पक्ष दशमी तिथि में शाम को तारा उदय होने के समय को विजया काल माना गया है। इसी कारण से इस तिथि को विजयादशमी कहते हैं। मान्यता है कि इस समय पर किया गया कोई भी कार्य सफल होता है। ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन अपराजिता स्रोत का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।

विज्ञापन
Dusshera 2021 poojan is incomplete without this flower  know its importance and poojan vidhi of vijayadashami
दशहरा 2021 - फोटो : istock

इस तरह होता है अपराजिता के पुष्प से पूजन

अपराजिता के नीले पुष्प से अपराजिता पूजन करने से अपराजित रहने का वरदान प्राप्त होता है। अपराजिता पूजन के बाद कलाई पर अपराजिता की लता बांधी जाती है। इसके बाद मां अपने बच्चों की कलाई पर अपराजिता की बेल बांधती है और उनके सदैव विजय रहने की कामना करती हैं। ज्योतिषियों के अनुसार माता अपराजिता की पूजा का समय दोपहर के तत्काल बाद का होता है। दोपहर से संध्या काल के बीच में कभी भी माता अपराजिता की पूजा कर यात्रा भी प्रारंभ की जा सकती है। यात्रा पर जाते समय माता अपराजिता की स्तुति अवश्य करनी चाहिए। जिससे यात्रा में कोई भी विघ्न न हो।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed