सनातन धर्म में श्रीमहालक्ष्मी की प्रसन्नता का पवित्र पर्व कार्तिक अमावस्या 'दीपावली'पर्व 14 नवंबर शनिवार को मनाया जाएगा। इसी दिन मां श्रीमहालक्ष्मी, श्रीमहाकाली, भगवान गणेश, श्रीकुबेर, कुलदेवता तथा अपने अपने ईष्ट आदि की पूजा-आराधना करके प्राणी वर्ष पर्यंत सुखी जीवन यापन करने का प्रयास करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माँ श्रीमहालक्ष्मी कार्तिक अमावस्या को मध्यरात्रि के समय अपने भक्तों के घर जा-जाकर उन्हें धन-धान्य से सुखी रहने का आशीर्वाद देती हैं। वैसे तो इस दिन के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त प्रदोष काल तथा महानिशीथ काल को माना गया है किंतु, अमावस्याकाल के आरंभ होने से लेकर अंततक के मध्य नक्षत्र संयोग, लग्न काल और चौघड़िया जैसे कई ऐसे मुहूर्त होते हैं जिनके मध्य बड़े से बड़े कार्य आरंभ करके प्राणी पूर्णसफलता प्राप्त कर सकता है।
Diwali Shubh Muhurat 2020: महालक्ष्मी की प्रसन्नता का पर्व दीपावली, जानिए लक्ष्मी गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त
दीपावली के प्रसिद्ध मुहूर्तो में चर,लाभ,अमृत और शुभ चौघड़िया मुहूर्त भी श्रेष्ठ माना गया है साथ ही स्थिर लग्न अथवा शुभ ग्रहों से प्रभावित लग्न को भी श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन पूजा आराधना के श्रेष्ठ मुहूर्त इस प्रकार हैं।
फैक्ट्री, व्यापारिक प्रतिष्ठान, शोरूम तथा दुकान आदि के लिए पूजा
इस वर्ष दीपावली के दिन का बताये गए उपरोक्त सभी प्रतिष्ठानों में गद्दी की पूजा, कुर्सी की पूजा, गल्ले की पूजा, तुला पूजा, मशीन-कंप्यूटर, कलम-दवात आदि की पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 'अभिजित दोपहर 12 बजकर 09 मिनट से आरम्भ हो जाएगा इसी के मध्य क्रमशः चर, लाभ और अमृत की चौघडियां भी विद्यमान रहेंगी जो शायं 04 बजकर 05 मिनट तक रहेंगी। इसी काल के मध्य किसी भी तरह के व्यापारिक प्रतिष्ठान जहां से आपके धनागमन का साधन बना हो उस स्थान की पूजा करना श्रेष्ठ रहेगा।
गृहस्थों के लिए पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त प्रदोष काल
सायं 5 बजकर 24 मिनट से रात्रि 8 बजकर 06 तक प्रदोष काल मान्य रहेगा। इसके मध्य रात्रि 7 बजकर 24 मिनट से सभी कार्यों में सफलता और शुभ परिणाम दिलाने वाली स्थिर लग्न ‘वृषभ’का भी उदय हो रहा है। प्रदोष काल से लेकर रात्रि 7 बजकर 5 मिनट तक लाभ की चौघड़िया भी विद्यमान रहेगी। यह भी मां श्रीमहालक्ष्मी और गणेश की पूजा के लिए श्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक है। इसी समय परम शुभ नक्षत्र ‘स्वाति’भी विद्यमान है जो 8 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। सभी गृहस्थों के लिए इसी समय के मध्य में माँ श्रीमहालक्ष्मी जी की पूजा-आराधना करना श्रेष्ठतम रहेगा।
विद्यार्थियों और सकाम अनुष्ठान के लिए अतिशुभ मुहूर्त निशीथ काल
जप-तप पूजा-पाठ आराधना तथा विद्यार्थियों के लिए माँ श्री महासरस्वती की वंदना करने का समय रात्रि 8 बजकर 06 से 10 बजकर 49 तक रहेगा। जो विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर हैं अथवा जिन्हें पढ़ने के बाद भी भूलने की परेशानी रहती है वह इस दिन मां सरस्वती की आराधना करके अपने मनोरथ सिद्ध कर सकते हैं। इसी समय में श्रीसूक्त का पाठ कनकधारा स्तोत्र, पुरुष सूक्त, श्रीगणेश अथर्वशीर्ष तथा लक्ष्मी गणेश कुबेर आज की प्रसन्नता के लिए तमन्ना करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करन वाली माँ श्री महाकाली, प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाने वाले भगवान श्रीकाल भैरव की पूजा, तांत्रिक जगत तथा ईस्ट साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त महानिशीथ काल का आरंभ रात्रि 10 बजकर 49 मिनट से आरंभ होकर मध्य रात्रि पश्चात 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस काल के मध्य की गई साधना, मारण मोहन उच्चाटन, विद्वेषण, वशीकरण आदि के लिए मंत्र जाप का फल अमोघ होता है और वह मंत्र आपकी रक्षा करने में सहायक सिद्ध होता है।