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Dev Diwali 2021: काशी में क्यों मनाई जाती है देव दीपावली ? जानिए महत्व और शुभ मुहूर्त

Thu, 18 Nov 2021 07:05 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 18 Nov 2021 07:05 AM IST
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dev diwali 2021 know date time significance rituals and why dev diwali celebrate in banaras
dev diwali 2021: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवलोक से सभी देवी- देवता गण पवित्र नगरी वाराणसी यानि महाकाल की नगरी काशी में पधारते हैं। - फोटो : अमर उजाला
Dev Diwali 2021: हर वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि पर दीपावली का त्योहार मनाया जाता है और इसके 15 दिनों के बाद कार्तिक पूर्णिमा तिथि पर देव दीपावली का उत्सव मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 19 नवंबर 2021 को है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष स्थान होता है और इनमें कार्तिक माह में आने वाली पूर्णिमा का तो विशेष महत्व है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही समस्त देवी-देवता स्वर्ग से धरती पर आते हैं और गंगा स्नान करने के बाद दीपोत्सव का त्योहार मनाते हैं। देव दिवाली पर लोग अपने घर पर दीए और सुंदर-सुंदर रंगोली से मुख्य द्वार को सजाते हैं। देव दीवाली को मुख्य रूप से शिव की नगरी वाराणसी में बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दिन गंगा आरती के साथ गंगा के घाटों और शहर की हर गली में दीपक से रोशनी की जाती है। आइए जानते हैं कि आखिरकार काशी में ही क्यों देव दीपावली को इतने उत्साह के साथ मनाया जाता है?
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dev diwali 2021 - फोटो : अमर उजाला

काशी में ही देव दीपावली क्यों?
इस बार 19 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा है। इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवलोक से सभी देवी- देवता गण पवित्र नगरी वाराणसी यानि महाकाल की नगरी काशी में पधारते हैं। इसलिए कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को काशी में बहुत साज-सज्जा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रिपुरासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से सभी बहुत त्रस्त हो चुके थे। तब सभी को उसके आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने उस राक्षस का संहार कर दिया। जिससे सभी को उसके आतंक से मुक्ति मिल गई। जिस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का संहार किया था, वह कार्तिक पूर्णिमा का दिन था। तभी से भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी पड़ा। इससे सभी देवों को अत्यंत प्रसन्नता हुई। तब सभी देवतागण भगवान शिव के साथ काशी पहुंचे और दीप जलाकर खुशियां मनाई। कहते हैं कि तभी से ही काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती रही है। इस दिन  दीप दान का बहुत महत्व माना गया है। इसलिए इस दिन विशेष रूप से दीपदान किया जाता है।

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कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
हिंदू धर्म में कार्तकि पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। पूरे कार्तिक माह में पूजा, अनुष्ठान, जप,तप और दीपदान का विशेष महत्व होता है। कार्तिक माह में ही देवी लक्ष्मी की जन्म हुआ था और इसी महीने में भी भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से जागे थे। कार्तिक पूर्णिमा तिथि पह ही गुरु नानक की जयंती मनाई जाती है। इस तिथि पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। 

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dev diwali - फोटो : Instagram
देव दीवाली 2021 तिथि और शुभ मुहूर्त
कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 18 नवंबर 2021 की रात 12 बजकर 02 मिनट से आरंभ हो जाएगी जो 19 नवंबर 2021 को 02 बजकर 29 मिनट को समाप्त होगी। देव दिवाली पर भी प्रदोष काल में पूजा की जाती है। 



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