फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

दही हांडी 2026: 5 या 6 सितंबर कब है दही हांडी? जानें क्यों मनाते ये पर्व

Thu, 03 Sep 2026 04:12 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Thu, 03 Sep 2026 04:12 PM IST
सार

जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का पर्व मनाया जाता है। ह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ एकता, साहस, टीमवर्क और सामूहिक उत्साह का प्रतीक बन चुका है। आइए जानते हैं इस साल यह पर्व किस दिन मनाया जाएगा और इसकी पौराणिक मान्यताएं क्या हैं।

विज्ञापन
Dahi Handi 2026: Date History Significance & Celebration Krishna Makhan Chor Story
Dahi Handi 2026 - फोटो : AI

जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने के बाद अगले दिन दही हांडी का पर्व मनाया जाता है। कई जगह इसे गोपालकाला भी कहा जाता है। आज यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ एकता, साहस, टीमवर्क और सामूहिक उत्साह का प्रतीक बन चुका है। इस दिन गोविंदा पथक ऊंचाई पर बांधी गई मटकी तक पहुंचने के लिए मानव पिरामिड बनाते हैं। इस साल दही हांडी 5 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं इस पर्व का महत्व और पौराणिक मान्यताएं।

Dahi Handi 2026: Date History Significance & Celebration Krishna Makhan Chor Story
कान्हा की माखन चोरी से जुड़ी है कहानी - फोटो : adobe stock

कान्हा की माखन चोरी से जुड़ी है कहानी
दही हांडी की परंपरा को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि बाल गोपाल को माखन और दही बहुत प्रिय था। गोकुल की महिलाएं मटकी में दही-माखन भरकर उसे ऊंचाई पर टांग देती थीं, ताकि बच्चे उसे आसानी से न निकाल सकें।

कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर मानव पिरामिड बनाते और मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ देते थे। इसके बाद सभी मिलकर उसमें रखा माखन-दही खाते थे। आज दही हांडी में मटकी फोड़ने की परंपरा को कान्हा की इसी नटखट लीला की याद माना जाता है।

Dahi Handi 2026: Date History Significance & Celebration Krishna Makhan Chor Story
जन्माष्टमी के अगले दिन क्यों मनाते हैं? - फोटो : amar ujala

जन्माष्टमी के अगले दिन क्यों मनाते हैं?
जन्माष्टमी की रात कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जाता है, जबकि अगले दिन उनकी बाल लीलाओं को याद करने की परंपरा है। माखन और दही से जुड़ी कान्हा की शरारतें उनकी सबसे लोकप्रिय बाल लीलाओं में शामिल हैं। इसी वजह से दही हांडी जन्माष्टमी के अगले दिन मनाई जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Dahi Handi 2026: Date History Significance & Celebration Krishna Makhan Chor Story
महाराष्ट्र में कैसे बनी बड़ी परंपरा? - फोटो : adobe stock

महाराष्ट्र में कैसे बनी बड़ी परंपरा?
दही हांडी का सबसे भव्य रूप महाराष्ट्र में देखने को मिलता है। मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे शहरों में यह बड़े सार्वजनिक आयोजन का रूप ले चुका है। अलग-अलग इलाकों में गोविंदा मंडल बनते हैं और मटकी फोड़ने की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।

ढोल-ताशों और संगीत के बीच टीमें कई स्तरों वाली मानव पिरामिड बनाकर हांडी तक पहुंचती हैं। कई आयोजनों में विजेता टीमों को पुरस्कार भी दिए जाते हैं।

विज्ञापन
Dahi Handi 2026: Date History Significance & Celebration Krishna Makhan Chor Story
दही हांडी - फोटो : amar ujala

दही हांडी का संदेश
दही हांडी सिर्फ मटकी फोड़ने का उत्सव नहीं है। यह मिल-जुलकर लक्ष्य हासिल करने, एक-दूसरे पर भरोसा रखने और सहयोग करने की सीख देता है। मानव पिरामिड में सबसे ऊपर पहुंचने वाला गोविंदा तभी सफल होता है, जब पूरी टीम मजबूती से उसका साथ देती है। यही संदेश दही हांडी को आज भी खास और लोकप्रिय बनाता है।

श्रीकृष्ण और अंक 8 का दिव्य संबंध: अष्टयाम सेवा तथा 8 बार भोग लगाने का धार्मिक रहस्य

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed