Hartalika Teej 2025: भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन महिलाएं हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत बड़ा ही कठिन होता है। यह सौभाग्यवती महिलाओं का खास पर्व हैं और महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत करती है तथा विवाहिताएं पति की लंबी उम्र और कुंवारी लड़कियां अच्छा वर पाने की कामना से भगवान शिव माता पार्वती जी की मिट्टी से बनी प्रतिमा की अष्ट प्रहर पूजा करती है। आइए इस पर्व के महत्व और नियम को विस्तार से जाने हैं।
Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज पर क्यों मिट्टी के शिवलिंग बनाकर करते हैं पूजा, जानिए महत्व और नियम
Hartalika Teej 2025: भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन महिलाएं हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत बड़ा ही कठिन होता है।
क्यों बनाते हैं मिट्टी के शिवलिंग?
माता सती ने देह त्यागने के बाद हिमवान और हेमावती के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। मां पार्वती ने भगवान शंकर को पाने के लिए कठिन तप किया था। इसके लिए उन्होंने अपने बाल्यकाल में ही घोर तप प्रारंभ कर दिया था। इस बात को लेकर उनके माता पिता बड़े चिंतित भी रहते थे। पार्वती जी ने सभी से कह दिया था कि वह सिर्फ महादेव को ही पति के रूप में स्वीकार करेंगी और किसी को नहीं। फिर एक सखी की सलाह पर पार्वती जी ने घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की आराधना की। अंत में भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी से शिवलिंग बनकर विधिवत पूजा की और रातभर जागरण किया। पार्वती जी के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था। तभी से इस दिन मिट्टी के शिवलिंग बनाकर पूजा करने और व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।
क्यों रखती हैं महिलाएं ये व्रत
इस व्रत में विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना करती हैं जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर के लिए इस व्रत को रखती हैं।
हरतालिका तीज की अष्ट प्रहर पूजा
24 घंटे में आठ प्रहर होते हैं- दिन के चार प्रहर में पूर्वाह्न, मध्याह्न, अपराह्न और सायंकाल और रात के चार प्रहर- प्रदोष, निशिथ, त्रियामा एवं उषा आते हैं।
- पहली पूजा: प्रातः:04:30 से 05:16 के बीच या सुबह 11 से 12 के बीच।
- दूसरी पूजा: शाम 06:36 से 07:45 के बीच।
- तीसरी पूजा: रात 11:56 से 12:42 के बीच।
- चौथी पूजा: रात 02:30 से 03:30 बजे के बीच।
- पांचवीं पूजा: सुबह 05 बजे या ब्रह्म मुहूर्त में।
- सुबह की पूजा के बाद ही पारण किया जाता है।
- स्थानीय समय अनुसार मुहूर्त में 1 से 5 मिनट का अंतर होता है।
हरतालिका व्रत के कड़े नियम
- तिथि के प्रारंभ ने से पूर्व ही अन्न जल का त्याग कर दिया जाता है। सूर्योदय के बाद नित्यकर्म से निवृत्त होकर पूजा की शुरुआत होती है। व्रत का संकल्प लिया जाता है और तब विधिवत पूजा का प्रारंभ होता है। अगले दिन सुबह पूजा के बाद जल पीकर व्रत खोलने का विधान है।
- मान्यता के अनुसार यदि कोई भी कुंवारी या विवाहित महिला एक बार इस व्रत को रखना प्रारंभ कर देती हैं तो उसे जीवन भर यह व्रत रखना ही होता है। बीमार होने पर दूसरी महिला या पति इस व्रत को रख सकता है।
- जनश्रुति अनुसार ऐसी मान्यता भी है कि जिस भी तरह का भोजन या अन्य कोई पदार्थ ग्रहण कर लिया जाता है तो अन्न की प्रकृति के अनुसार उसका अगला जन्म उस योनि में ही होता है। लेकिन यह मान्यता एक भर है।
- इस व्रत में महिलाओं को रातभर जागरण करना होता है और जागकर मिट्टी के बनाए शिवलिंग की अष्ट प्रहर अनुसार पूजा करना होती है और रातभर जागकर भजन-कीर्तन या जप किया जाता है।
- इस व्रत के दौरान हरतालिका तीज व्रत कथा को सुनना जरूरी होता है। मान्यता है कि कथा के बिना इस व्रत को अधूरा माना जाता है।