कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को आस्था का महापर्व छठ मनाया जाता है। मुख्य रूप से यह पर्व बिहार में मनाया जाता है, लेकिन देश से लेकर विदेशों तक में इस पर्व की धूम रहती है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र, उज्जवल भविष्य और सुखमय जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस व्रत को महिलाओं सहित पुरूषों के द्वारा भी रखा जाता है। इस व्रत को अत्यंत कठिन माना गया है क्योंकि यह व्रत चौबीस घंटो से अधिक समय तक निर्जला रखा जाता है। छठ पर्व का मुख्य व्रत षष्ठी तिथि को रखा जाता है लेकिन यह पर्व चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी तिथि को प्रातः सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के बाद आरंभ किया जाता है। छठ महापर्व नहाय-खाय से आरंभ होता है और खरना के पश्चात व्रत शुरू किया जाता है। तो चलिए जानते हैं कि इस बार कब है छठ और किस दिन क्या।
Chhath puja 2021: चार दिनों तक चलता है छठ का महापर्व, नहाय-खाय से समापन तक जानिए किस दिन क्या
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इस बार एवं पर्व का आरंभ 8 नवंबर दिन सोमवार को नहाय-खाय से आरंभ होगा इसके अगले दिन यानी 9 नवंबर दिन मंगलवार को खरना करके व्रत शुरू किया जाएगा और 10 नवंबर दिन बुधवार को छठ व्रत मुख्य पूजन किया जाएगा। इसके अगले दिन सप्तमी 11 नवंबर दिन बृहस्पतिवार को प्रातः सूर्योदय के समय जल देकर छठ व्रत का समापन किया जाएगा।
छठ पर्व में साफ-सफाई का विशेष महत्व होता है। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को छठ पर्व का प्रथम दिन होता है। इस दिन व्रती प्रातः काल जल्दी उठकर साफ-सफाई करते हैं और स्नानादि करने के पश्चात छठ पर्व का आरंभ किया जाता है।
कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को छठ व्रत का दूसरा दिन होता है। इस दिन को खरना या लोहंडा भी कहा जाता है। इस दिन मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से आग जलाकर साठी के चावल, दूध और गुड़ की खीर बनाई जाती है। संध्या के समय नदी या सरोवर पर जाकर सूर्य को जल दिया जाता है और इसके बाद छठ का कठिन व्रत आरंभ हो जाता है।
षष्ठी तिथि को छठ पर्व का मुख्य पूजन किया जाता है। इस दिन प्रातः सूर्योदय के समय नदी सरोवर पर जाकर अर्घ्य दिया जाता है और छठी मईया का पूजन किया जाता है। व्रती पूरे दिन कठिन निर्जला उपवास करते हैं। शाम के समय पुनः नदी पर जाकर पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके अगले दिन सप्तमी को प्रातः उगते सूर्य को जल दिया जाता है और छठ पर्व का समापन किया जाता है।