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Chhath Puja 2021: इन चार परंपराओं के बिना अधूरा है छठ पर्व, जानिए इन परंपराओं के बारे में

Wed, 10 Nov 2021 07:24 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला
धर्म डेस्क, अमरउजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 10 Nov 2021 07:24 AM IST
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Chhath Puja 2021: Chhath festival is incomplete without these four traditions, know about these traditions
छठ पूजा 2021 - फोटो : Istock

छठ पर्व, छठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। यह एक ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है। छठ पर्व मुख्यः रुप से ॠषियो द्वारा लिखी गई ऋग्वेद मे सूर्य पूजन, उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार मनाया जाता हैं। छठ पूजा सूर्य, उषा, प्रकृति,जल, वायु और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित है। छठ में कोई मूर्तिपूजा शामिल नहीं है। छठ महापर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से आरंभ होता है और इसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी को होता है।  इस पर्व में पवित्र स्नान, उपवास,लंबे समय तक पानी में खड़ा होना, प्रसाद और अर्घ्य देना शामिल है। इस पर्व की परंपरा काफी कठिन है। और इन परंपराओं के बिना यह पर्व अधूरा है। आइए जानते हैं क्या है छठ महापर्व की ये परम्पराएं जिनके बिना यह त्योहार अधूरा है। 

Chhath Puja 2021: Chhath festival is incomplete without these four traditions, know about these traditions
छठ पूजा 2021 - फोटो : अमर उजाला

छठ पर्व की पहली परंपरा है नहाए-खाए

कार्तिक शुक्ल पक्ष कि चतुर्थी तिथि को छठ महापर्व कि पहली परंपरा का निर्वाह किया जाता है। छठ पर्व का पहला दिन आज यानि 8 नवंबर को मनाया जा रहा है। आज का दिन यानि कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को नहाए-खाए  के रूप में मनाया जाता है। इस परंपरा के अनुसार सबसे पहले घर की सफाई कर उसे शुद्ध किया जाता है। इसके पश्चात छठव्रती स्नान कर शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं। घर के अन्य सभी सदस्य व्रती सदस्यों के भोजन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन के रूप में कद्दू-चने की दाल और चावल ग्रहण किया जाता है। 

Chhath Puja 2021: Chhath festival is incomplete without these four traditions, know about these traditions
छठ पूजा 2021 - फोटो : instagram/bihar_vibes

छठ पर्व की दूसरी परंपरा है खरना

छठ पर्व के दूसरे दिन यानि 9 नवंबर को दूसरी परंपरा का निर्वाह होता है। दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रतधारी दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे 'खरना' कहा जाता है। खरना के प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है।

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Chhath Puja 2021: Chhath festival is incomplete without these four traditions, know about these traditions
छठ पूजा 2021 - फोटो : self

छठ पर्व की तीसरी परंपराअस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य 

छठ पर्व का मुख्य दिन होता है कार्तिक शुक्ल षष्ठी, यानि तीसरा दिन।  यह तीसरा दिन 10 नवंबर को है। इस दिन छठ प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल के लड्डू बनाते हैं। इसके अलावा फल भी छठ प्रसाद के रूप में शामिल होता है। सायंकाल को पूरी तैयारी और व्यवस्था कर बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और व्रती के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर जाते हैं। सभी छठव्रती तालाब या नदी किनारे सामूहिक रूप से अर्घ्य दान संपन्न करते हैं। सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है तथा छठी मैया की प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है।

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छठ पूजा 2021

चौथी परंपरा के साथ ही होता है छठ पर्व का समापन 

चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी 11 नवंबर को पड़ रही है। इस दिन व्रती वहीं पुन: इकट्ठा होते हैं, जहां उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था। व्रती सुबह उगते सूर्य को कमर भर पानी में रहकर अर्घ्य देती हैं। और व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं।

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