छठ महापर्व 20 नवंबर को है। लेकिन इस पर्व की शुरूआत नहाय-खाय के दिन यानि 18 नवंबर से हो गई है । हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन नहाय-खाय की रस्म होती है। जबकि षष्ठी तिथि को छठ पूजा और सप्तमी के दिन व्रत का पारण किया जाता है। नहाय-खाय के दिन से ही छठ व्रत रखने वाले व्रती सूर्य देव और छठी माई का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा-अनुष्ठान शुरू कर देते हैं।
Chhath Puja 2020: नहाय-खाय के साथ आज से छठ पूजा आरंभ, जानें छठ की पूजा विधि
किया जाता है पवित्र स्नान
छठ के पहले व्रत को नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रती नदी या तालाब में स्नान करके छठ व्रत करने का संकल्प लेते हैं। इस व्रत के दिन लौकी और सरसों का साग खाने का बड़ा महत्व है।
शुद्ध और सात्विक भोजन करने की है परंपरा
इसका कारण यह है कि कद्दू को शुद्ध और सात्विक माना जाता है। यह सुपाच्य भी होता है। जबकि सरसों का साग खाने का रिवाज इसलिए है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।
ये हैं खास पकवान
सरसों के साग को शुद्ध माना जाता है। छठ पर्व के दौरान लौकी और सरसों का साग बहुतायत में मिलता है इसलिए भी नहाय खाय में लौकी और सरसों का साग खाया जाता है।
छठ व्रत में व्रती को काफी समय तक जल में खड़ा रहना पड़ता है, इससे सर्दी जुकाम की परेशानी न हो इसलिए व्रती सरसों का साग खाते हैं।