दिवाली बीत जाने के बाद अब छठ महापर्व आ रहा है। इस साल यह त्योहार 20 नवंबर को मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। हालांकि इस पर्व की शुरूआत नहाय-खाय से हो जाती है, जो कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को होता है जबकि इस पर्व का अंत इसी माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन होता है।
Chhath Puja 2020: रामायण और महाभारत से जुड़ी है छठ पूजा की मान्यता
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छठ पर्व सूर्य की उपासना का त्योहार है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि सूर्यदेव की पूजा करने से व्रत करने वालों को सुख, सौभाग्य और समृद्घि की प्राप्ति होती है। इस दिन किसी नदी या तालाब में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
यह हिन्दू आस्था का बड़ा पर्व है। इस व्रत से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं। नहाय-खाय से शुरू होने वाले छठ पर्व के बारे में कहा जाता है कि इसकी शुरूआत महाभारत काल से ही हो गई थी। एक कथा के अनुसार महाभारत काल में जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए थे तब द्रौपदी ने इस चार दिनों के व्रत को किया था।
इस पर्व पर भगवान सूर्य की उपासना की थी और मनोकामना में अपना राजपाट वापस मांगा था। इसके साथ ही एक और मान्यता प्रचलित है कि इस छठ पर्व की शुरूआत महाभारत काल में कर्ण ने की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और वे पानी में घंटो खड़े रहकर सूर्य की उपासना किया करते थे। जिससे प्रसन्न होकर भगवान सूर्य ने उन्हें महान योद्धा बनने का आशीर्वाद दिया था।
वहीं एक अन्य कथा के अनुसार कहते हैं मां सीता ने छठ पूजा की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार 14 वर्ष वनवास के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूय यज्ञ करने का फैसला लिया। इसके लिए मुग्दल ऋषि को आमंत्रण दिया गया था, लेकिन मुग्दल ऋषि ने भगवान राम एवं सीता को अपने ही आश्रम में आने का आदेश दिया।