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Chaturmas 2021: आज से चातुर्मास आरंभ, जानिए क्यों मनाया जाता है और किन देवी-देवताओं की होती है पूजा?

Tue, 20 Jul 2021 07:05 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 20 Jul 2021 07:05 AM IST
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Chaturmas 2021 Importance And Know Puja Rules Niyam and Methods of Worship
चातुर्मास 2021 : चातुर्मास के दौरान यानी 4 माह में विवाह संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं।

सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। इसमें आने वाले चार महीने जिसमें सावन, भादौ,आश्विन और कार्तिक का महीना आता है। चातुर्मास के चलते एक ही स्थान पर रहकर जप और तप किया जाता है। बर्षा ऋतु और बदलते मौसम से शरीर में रोगों का मुकाबला करने अर्थात रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। दरअसल इन 4 महीनो में व्यक्ति की पाचनशक्ति भी कमजोर हो जाती है इससे अलावा भोजन और जल में हानिकारक बैक्टीरिया की तादाद भी बढ़ जाती है। इन कारणों से वैदिक काल से ही यात्रा करना या मंगल आयोजन करना जन हिताय में बंद कर दिया जाता था।



आज भी जैन मुनि चातुर्मास में एक ही स्थान पर बैठकर जप, तप, साधना व प्रवचन करते हैं। रामचरितमानस में एक प्रसंग है जिसमें  भगवान श्रीराम वनवास के समय चिंता व्यक्त करते हैं कि चौमासा भी बीत चुका है,अब हमें लंका की ओर प्रस्थान कर देना चाहिए। इन महीनों में खान-पान, व्रत के नियम और संयम का पालन करना चाहिए। यह भी मान्यता है कि आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, इसलिए इस समय किसी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं। मांगलिक कार्यों की फिर शुरुआत कार्तिक मास की देवउत्थान एकादशी के दिन होती है। चातुर्मास के दौरान यानी 4 माह में विवाह संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं। चातुर्मास के इस काल में व्रत-पूजन का विशेष लाभ मिलता है।आइए जानते हैं कि चातुर्मास में किन महीनों में किन देवी-देवताओं की पूजा विशेषरूप से फलदायी है।

Chaturmas 2021 Importance And Know Puja Rules Niyam and Methods of Worship

श्रावण मास
चातुर्मास में भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने के लिए विश्राम करते हैं ऐसे में सृष्टि का संचालन भगवान शिव अपने हाथों में लेते हैं। भगवान शिव को सावन का महीना सबसे प्रिय है। सावन महीने में मुख्य रूप से शिवलिंग की पूजा का विधान है और उस पर जल तथा बेल पत्र अर्पित किया जाता है। श्रावण माह से ही भगवान शिव की कृपा के लिए सोलह सोमवार के उपवास आरंभ किए जाते हैं। इस  महीने में शिव की पूजा करने से भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा बरसती है। सावन में भोलेनाथ का पार्थिव पूजन, शिव सहस्त्रनाम का पाठ, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक बिल्वपत्र चढ़ाने से मनोकामनाएं पूर्ण होगी।इन चार महीनों में सावन का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इस माह में जो व्यक्ति भागवत कथा, भगवान शिव का पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, दान करेगा उसे अक्षय पुण्य प्राप्त होगा।

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भाद्रपद महीना
भाद्रपद महीने में भगवान गणेश और विष्णु जी के कृष्ण अवतार की पूजा का विधान है। इसी महीने में सभी देवताओं में प्रथम पूज्य माने जाने वाले गणेश जी का अवतरण दिवस,गणेश चतुर्थी का पावन पर्व देश ही नहीं ,अपितु विश्वभर के सनातन धर्मावलम्बियों द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी भी इसी मास में मनाई जाती है और । कृष्ण भक्त विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में छः से बारह दिन तक विधिपूर्वक भगवान कृष्ण का पूजन करते हैं।

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आश्विन मास
चातुर्मास का तीसरा महीना मां दुर्गा की उपासना के लिए समर्पित है। इस महीने में मां दुर्गा के शारदीय नवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाता है। भक्त पूरे नौ दिन मां दुर्गा के लिए कलश स्थापना कर व्रत रखते हैं और दशमी के दिन व्रत का पारण कर कलश का विसर्जन करते हैं एवं धूम-धाम से दशहरे का त्यौहार मनाते हैं।
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कार्तिक मास
चातुर्मास का आखिरी महीना कार्तिक मास हिन्दू धर्म में अत्यधिक पवित्र महीना माना जाता है। इसी माह से देव तत्व मजबूत होते हैं। एकादशी की तिथि, जिसे देवउत्थान एकादशी भी कहते हैं, पर मान्यता अनुसार भगवान विष्णु योग निद्रा त्याग कर अपना कार्यभार संभालते हैं और सभी मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो जाते हैं। इस दौरान कार्तिक अमावस्या तिथि पर दीपावली में लक्ष्मी पूजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त चातुर्मास में श्री रामजी के भक्त हनुमान जी और भगवान विष्णु के वामन अवतार,सूर्य देव, जल देव की पूजा करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है।

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