आज से शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहें हैं। सभी देशवासियों को माता यानि शक्ति की उपासना आराधना पूर्ण संयम के साथ करनी चाहिए और इस कोरोना रूपी महिषासुर के समूल नाश के लिए माता भगवती का आवाह्न करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार वर्तमान परिवेश में देखा जाये तो तो आज हम कोरोना रूपी संकट से संघर्ष कर रहे हैं। हमें इन नौ दिनों में अपने अंदर ऐसी उर्जा को जाग्रत करना है जिससे हम कोरोना का पूर्ण विनाश कर सकें और इसके लिए आत्म संयम का पालन अनिवार्य है। हमारे शास्त्रों में देश, काल परिस्थिति के अनुसार कार्य करने को कहा गया है। वर्तमान में देश की परिस्थिति के अनुसार घर में रहना भी संयम और साधना का एक अंग है।
Chaitra Navratri 2021: कोरोना काल में घर पर कैसे करें नवरात्रि पूजा, जानें घटस्थापना की संपूर्ण विधि और मंत्र
अष्टमी और नवमी में हवन व कन्या का विधान
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के हवन और कन्या पूजन का विधान हैं। देश, काल, परिस्थिति के अनुसार इस वर्ष भक्तगण अपने घर में कलश स्थापना, हवन, यज्ञ का अनुष्ठान करें और कन्या पूजन में किसी संस्था के माध्यम से कन्याओं को कुछ जरूरी सामान दान करें। जो मंदिरों के दानपात्र में दान देते थे वे कुछ गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन के माध्यम से दान करें लेकिन यह सब सामाजिक दूरी बनाकर ही करें।
शास्त्रों में कहा गया है कि दान का फल तभी मिलेगा जब दाहिने हाथ से किया हुआ दान बांये हाथ को भी पता न चले तभी यह दान रूपी यज्ञ सफल होगा और इस महिषासुर रूपी कोरोना का विनाश होगा और पूर्ण विश्वास रखें हमारी साधना, यज्ञ, दान के प्रतिफल में माता भगवती इस कोरोना रूपी महिषासुर का निश्चित विनाश करेंगी।
नवरात्रि के नौ दिनों तक मां के नौ स्वरुपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। ये नौ दिन शक्ति को समर्पित किए जाते हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना (कलश स्थापित) की जाती है। कलश को गणेश जी का प्रतीक माना जाता है इसलिए सर्वप्रथम कलश स्थापना करके उसका पूजन किया जाता है। जल से भरे हुए कलश को सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है।
वास्तु में पूजा करने के स्थान के बारे में भी दिशा का महत्व बताया गया है इसलिए कलश की स्थापना और मां की चौकी लगाते समय भी दिशा का ध्यान रखना आवश्यक होता है। जानते हैं कलश स्थापना कैसे और किस दिशा में करनी चाहिए।