Bhadrapad Purnima 2020: भाद्रपद पूर्णिमा 2 सितंबर को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भाद्रपद पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन उमा माहेश्वर व्रत किया जाता है। साथ ही इसी तिथि से पितृ पक्ष यानि श्राद्ध पक्ष शुरू हो जाते हैं, जो अश्विन अमावस्या पर समाप्त होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान सत्य नारायण की पूजा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करने का महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन दान-पुण्य के कार्य करने से शुभफल की प्राप्ति होती है।
Bhadrapad Purnima 2020: भाद्रपद पूर्णिमा आज, इस दिन किया जाता है उमा माहेश्वर व्रत
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भाद्रपद पूर्णिमा तिथि 1 सितंबर 2020 को सुबह 09:38 बजे से 2 सितंबर 2020 को सुबह 10:53 बजे तक रहेगी।
उमा माहेश्वर व्रत स्त्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस व्रत को करने वाले से बुद्धिमान संतान, और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत में व्रती को अपने पूजा स्थल पर शिव और पार्वती जी की प्रतिमा को स्थापित करते हुए उनका ध्यान करना चाहिए। भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए उन्हें धूप, दीप, गंध, फूल तथा शुद्ध घी का भोजन अर्पण करना चाहिए।
उमा माहेश्वर व्रत का वर्णन मतस्य पुराण में मिलता है जिसके अनुसार, एकबार दुर्वासा ऋषि भगवान शिव के दर्शन करके लौट रहे थे। रास्ते में उनकी भेंट भगवान विष्णु से हो गई। महर्षि ने भगवान शिव जी के द्वारा दी गई विल्व पत्र की माला भगवान विष्णु को दे दी। भगवान विष्णु ने उस माला को स्वयं न पहनकर गरुड़ के गले में डाल दी। इससे महर्षि दुर्वासा विष्णु जी पर क्रोधित हो उठे। क्रोध में उन्होंने विष्णु जी से कहा ‘तुमने भगवान शंकर का अपमान किया है। इससे तुम्हारी लक्ष्मी चली जाएगी। क्षीर सागर से भी तुम्हें हाथ धोना पड़ेगा और शेषनाग भी तुम्हारी सहायता न कर सकेंगे। यह सुनकर भगवान विष्णु ने महर्षि दुर्वासा को प्रणाम किया और इस श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा। इस पर महर्षि दुर्वासा ने जगत के पालनहार को उमा माहेश्वर का व्रत करने की सलाह दी। तब भगवान विष्णु ने यह व्रत किया और व्रत फल के रूप में उन्हें लक्ष्मी जी समेत समस्त शक्तियां पुनः प्राप्त हुईं।